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ऐतिहासिक फैसला होगा

 

भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित एवं निर्मित संविधान है जिसका निर्माण लगभग दो साल में किया गया है जिसके मूल रूप में 22 भाग ,395 अनुच्छेद  और  8 अनुसूचियां थीं जबकि वर्तमान में 470 अनुच्छेद, 25भाग और 12 अनुसूचियां है ∣

जो भारत के नागरिकों को 6 मौलिक अधिकार प्रदान करता हैं ∣ जिसमें 

*अनुच्छेद 14 ( समता का अधिकार) 

*अनुच्छेद 19( स्वंतत्रता का अधिकार) 

*अनुच्छेद 23( शोषण के विरूद्ध अधिकार) 

*अनुच्छेद 25 ( धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार) 

*अनुच्छेद 29 ( संस्कृति शिक्षा का अधिकार) 

*अनुच्छेद 32 (सवैधानिक उपचारों के अधिकार) की बात करता है जिसमें मुख्य रूप से बन्दी प्रत्यक्षीकरण , अधिदेश, परमादेश जैसी प्रक्रिया शामिल हैं ∣ जो भारत में सुप्रीम कोर्ट को ये अधिकार देती है कि वो हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली की समीक्षा कर सके ∣


अब आप कहेगें मैं आप सब को ये क्या बता रही हूँ इससे हम अवगत है मैं आप सब का ध्यान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस 

एनवी रमना के उस वक्तव्य पर दिलाना चाहती हूँ " जिसमें उन्होंने ये कहा कि महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देना चाहिए जिससे न्याय के पद पर बैठे लोगों  में महिलाओं की संख्या में वृद्धि हो सके जो अभी बहुत कम है ∣"


जिसमें उन्‍होंने न्‍यायपालिका के विभिन्‍न स्‍तरों में महिलाओं की कम संख्‍या का भी हवाला दिया और कहा कि महिलाएं न्‍यायपालिका और लॉ कॉलेजों में भी आरक्षण की हकदार हैं। 


सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमना के इस वक्तव्य का सरकारें किस तरह से अर्थ लेती है और 

उसके लिए कोई ठोस कदम उठाती है ∣ ये तो भविष्य के गर्भ में है किन्तु 

यू तो भारत में महिला आरक्षण का मुद्दा  अगर मुद्दा न रहकर 

एक बिल के रूप में आगे आता है जो कि 2008 में राज्यसभा में लाया गया था 2010 में लोकसभा में लाया गया किन्तु परित नहीं किया जा सका उस पर एक न ए सिरे से बहस होनी चाहिए और महिला आरक्षण को सभी से पर लागू किया जाना चाहिए क्योंकि 

अगर हम महिलाओं के प्रतिनिधित्व की स्थिति देखें तो वो बेहद खराब है ∣ 


 ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट 2021 के अनुसार, राजनीतिक सशक्तीकरण सूचकांक में भारत के प्रदर्शन में गिरावट आई है और साथ ही महिला मंत्रियों की संख्या वर्ष 2019 के 23.1% से घटकर वर्ष 2021 में 9.1% तक पहुँच गई है।

सरकार के आर्थिक सर्वेक्षणों में भी यह माना जाता है कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिला प्रतिनिधियों की संख्या बहुत कम है।( जानकारी दृष्टि IAS Magazine)

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हम शायद भूल गए

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life real meaning thought

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