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क्या आज भी है कोई बालिका वधू

 







बालिका वधू 

नाम लेते ही आनंदी और जग्गया की हंसी ठिठोली हम सब को याद आ जाती है ∣

बालिका वधू सीरियल भले ही बंद हुए काफी समय हो गया ह़ो किन्तु वो दर्शकों को आज भी उतना ही पसंद है ∣ जितना की पहले था और एक बार फिर बाल विवाह की कुरीतियों को खत्म करने के प्रयास से बालिका वधू 2 आ रहा है आज से हमारे घर रात 8 बजे VOOT  per और  COLORS TV  पर ∣


बालिका वधू के पहले सीजन पर अगर हम गौर फरमाए तो वो मुख्य रूप से राजस्थान के एक काल्पनिक गाँव पर आधारित था ∣ जबकि बालिका वधू 2 में गुजरात के एक काल्पनिक गाँव की कहानी दिखाई जाएगी जहाँ दो दोस्त अपनी दोस्ती के रंग को गहरा करने के लिए अपनी दोस्ती रिश्तेदारी में बदल लेते हैं जब उनके बच्चों की उम्र महज कुछ माह की होती है ∣  


इस बार के बालिका वधू में ये देखना बड़ा ही दिलचस्प होने वाला है, कि नयी आनंदी किस तरह से समाज की इस बुरी प्रथा से अपना मुकाबला करती है ∣


कितनी अजीब बात है न आज भी बच्चे की शादी इतनी कम उम्र में कर दी जाती है जहां उनके लिए

विवाह का मतलब केवल कपड़े, मिठाई और ढेर सारे तोहफे होते हैं, वो कच्ची उम्र में ऐसे पक्के रिश्ते में बंध जाते हैं जिसकी उनको कोई समझ नहीं होती है ∣


अफ़सोस आज भी देश में हर दिन एक नयी बालिका वधू बनाई जा रही है ∣ जिसे नहीं पता मेहंदी का महत्व पर उसके हाथ में उसके पति के नाम की मेंहदी लगाई जा रही है ∣ जिसके हाथ होना चाहिए कलम पर उसके हाथ में घर की जिम्मेदारी दी जा रही है ∣

"बाल हूँ बालिका समझों

अभी है हमारी उम्र पढ़ने की 

हमें वधू नहीं बल्कि बेटी समझों, 

क्यों कर रहे हो हमारा  ब्याह

कच्ची उम्र 

जहाँ नहीं पता हमें विवाह 

जैसे शब्द का अर्थ फिर भी क्यों कर दिए 

   हमारे हाथ पीले ∣"

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..