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जन्माष्टमी

 






जन्माष्टमी हिन्दू धर्म के लोगों का मुख्य त्यौहार होता है ∣ ऐसी पौराणिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण का जन्म हुआ था जो देवकी की आठवीं संतान के रूप में धरती पर आए थे जिनका मुख्य उद्देश्य अपने मामा क़ंस का वध करना था जिनके अत्याचार से समस्त मथुरा पाप मय हो गया था ∣ 

जिसने अपनी स़गी बहन देवकी और उसके पति वासुदेव को इसलिए कारागार में डाल दिया था कि वो अपने काल ( मृत्यु) को मर सके 

पर विधि के विधान को भला कौन रोक पाया कि वो दुराचारी कंस रोक पाता 

भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ उन्हें दो माँ मिली एक माँ देवकी ने उन्हें जन्म दिया तो दूसरी माँ यशोदा ने उन्हें पाल पोस कर बड़ा किया 

‌उन्हें इसी बीच क ई राक्षसों का वंधा किया और जब उनके जीवन का उद्देश्य पूर्ण हो गया तब उन्हें एक अच्छे राजा के रूप अपने राज्य का संचालन किया 

जिनका हिन्दी साहित्य के भक्तिकाल में एक युग है जिसे हम 'भक्तिकाल' के नाम से जानते हैं ∣ जिसमें कृष्ण भक्ति धारा के प्रमुख कवियों में सूरदास है ∣ जिनके कारण हिन्दी साहित्य में वात्सल्य रस की उत्पत्ति हुई ∣

 तो वही मीराबाई जो मुख्यत : राजस्थान की रहने वाली थी जिन्होंने श्री कृष्ण से प्रेम कर अपना जीवन कृष्ण के नाम किया जिनको राम रतन की प्रप्ति हुई ∣ जिनकी रचना केवल कृष्ण मयी थी जिसमें उन्हें कृष्ण से मिलने में कितनी बाधा आ रही है उसे राजस्थानी मिश्रित भाषा का उपयोग अपनी रचना में पिरोया था ∣ 

आज समकालीन समय में कृष्ण का जीवन हम सब के लिए एक प्रेरणा का स्वरूप है ∣

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..