जिंदगी की रफ़्तार में कही पिछड़ते रिश्ते

 


समय के साथ लोग बदल जाते हैं ∣ और परिस्थितियों में अक्सर  हम लोग बदल जाते हैं ∣ बहुत होते हैं, महान वो लोग जो नहीं बदलते, किसी हाल में जिनके लिए कल भी हम थे खास और आज भी है ∣ हम खास वो करीब रहते हैं हमेशा हमारे दिल के  पास और इस बीच दूर हो जाते हैं कुछ रिश्ते  टूट जाते हैं जैसे  कांच के सिक्के   ∣ 

जिंदगी की रफ्तार में बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच  कब हम अपनों के लिए अजनबी हो जाया करते हैं ∣ और कब अजनबी से खास   जैसे मालूम ही नहीं चलता है, बनते रिश्ते कब बिगड़ जाएं जैसे कुछ पता ही नहीं चलता है∣

आज समकालीन समय में जब हम सब का अपने रिश्तेदारों से लेकर अपने दोस्तों से मिलना केवल ऑनलाइन माध्यम से हो रहा है ∣ तो ऐसे में जरूरी है ,कि हम 

उनसे ऐसी कोई बात न गोपनीय रखें जिसे वो अन्य लोगों से जानकर हमें झूठा समझें  और   परिणामस्वरूप   हमारे रिश्ते में खटास आएं 

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