विनम्रता

 



जिस तरह एक नल जितना नीचे लगा हुआ होता है। वो उतना ही तेज हमें जल देता है ,ठीक उसी तरह मनुष्य जितना विनम्र होकर कोई कार्य करता है  उतना वो प्रगतिशील होता है।

क्या आसान होता है विनम्र होना? 

नहीं, पर इसका अनुसरण करने वाले का रास्ता ही अलग हो जाया करता है।

क्योंकि वो अपनी जिंदगी की आधी लड़ाई विनम्रता के जरिये विजयी हो जाते हैं । और शेष वो अपने जुनून ओर मेहनत के दम पर जीत लेते हैं।

आज समकालीन समय में जब हमें विनम्रता का पाठ पढ़ाने वाले हमारे गुरु जन, माता पिता, हमारे मित्र हम से क ई बार विनम्र होने को कहते हैं, तो हम में से  ज्यादातर  का उत्तर यही होता है ।कि हमें मत सिखाएं हम सब जानते हैं, 

तब हमें एक पल   रुक कर  ये जरूर विचार कर लेना चाहिए। कि कहीं हम कही कोई गलती तो नहीं कर रहे हैं, और उसका दोष दूसरों पर लगा रहे हैं।

एक बात हमेशा हम सब को ध्यान रखना चाहिए ,कि अगर हम अपने जीवन में शीर्ष स्थान पर पहुंचना चाहते हैं ।

तो हमें बहुत कुछ सहना होगा धैर्यता को अपना साथी बनाना होगा। इसके अलावा दूसरों की बातों से बिना आक्रमक हुए  हमें अपने रवैये में विनम्रता लाना होगा ।

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