झूठ बोलना पाप है नदी किनारे सांप है, झूठ बोले कौआ काटे काले कौए से डरिओ जैसी पत्तियाँ हम सब ने सुनी है ∣
ओर आप में से एक तिहाई लोग ऐसे भी होगें, जिन्होंने अपने आप से कभी भी झूठ नहीं बोला होगा ∣ भले ही इसके लिए आपको क ई तरह की परेशानी का सामना ही क्यों न करना पड़ा हो ∣
जबकि इसके विपरीत उन लोगों की संख्या ज्यादा है ∣ जो दूसरों को छोडि़ए अपने आप से भी दागाबाजी करने में किसी तरह की हिचकिचाहट नहीं करते हैं ∣
जबकि उन्हें ये मालूम है कि स्वयं से झूठ बोलना सबसे बड़ा गुनाह है ∣
जरा गौर फरमाएगा इस बात का कि भले हम पूरी दुनिया से झूठ बोले पर हमें अपने आप से कभी भी झूठ नही बोलना चाहिए क्योंकि अक्सर अपने आप से बोला गया झूठ हमें खुद के इतना नीचे गिरा देता है ∣ कि हम इससे उठने का साहस ही नहीं कर पाते हैं ∣
फिर भले हम दुनिया की नजरों में क्यों न सत्यवादी हरिश्चंद्र हो किन्तु हम से बड़ा इस दुनिया में और कोई झूठा नहीं ये हमारा मन हमें आत्मग्लानि करके बता देता है ∣
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