अक्सर हम दूसरों को किसी बड़ी जिम्मेदारी निभाते देखते हैं तो हमें लगता है कि इसमें क्या बड़ा है ∣ हमें भी ये जिम्मेदारी मिलेगी तो हम भी इसे निभा लेगें ∣
किन्तु इसके विपरीत जब हमें स्वयं ऐसी कोई जिम्मेदारी मिलती है ∣ तो एक पल के लिए हम बड़े खुश होते हैं, कि हम इसके लायक है ∣ कि आज हम इतने बड़े काम को कर रहे हैं ∣
तो वही इसकी धरातल पर वास्तविकता ये होती है ∣ कि यहाँ
पर पहुंचकर सिर्फ एक तिहाई लोग ही अपनी जिम्मेदारी निभा पाते हैं ∣
जबकि ज्यादातर लोग उस काम को तब तक नहीं करना चाहते हैं जब तक की उसे आसान न बनाया जाए ∣
जिसकी वास्तविकता यहां है कि इस दुनिया में कोई भी ऐसी चीज नहीं है जो आसान हो सबको उससे आसान बनने के लिए लगातार प्रयत्न करने की आवश्यकता होती है ∣


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