कई बार हम जल्दी -जल्दी में दूसरे पर इतना विश्ववास कर लेते हैं ∣ कि हम अपने बहीखाते की जानकारी उसे ये समझकर बता देते हैं ,कि वो हमारी पहचान का है भला उसको इसे क्या काम लेना है? और हमारे इसी भरोसे का लाभ उठाकर सामने वाला हमारे बहीखाते के जिम्मेदारी का निर्वाहन बहुत लापरवाही के साथ करता है ∣ जिसका नतीजा ये होता है ,कि
कुछ समय के बाद हमारे उस बहीखाते में बहुत सी गलतियां नजर आती है ∣ जिसे सुधारने पर हमें मालूम चलता है ∣ कि हम ने कितनी बड़ी गलती की उस पर विश्वास करने की आप अगर इससे बचना चाहते हैं ∣ तो अगली बार थोड़ी सतर्कता से काम ले क्योंकि सर्तकता ही बचाव है ∣
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