Skip to main content

ये कैसा समाज है


नारी तू नारायणी,नारी तुम शक्ति है ,नारी है तो ये जग सारा है जैसी महान बातें करने वाला ये समाज जब उसी नारी के साथ अन्याय करता है ∣ उसे अपने हाथ की कठपुतली बनाता है ∣ तब ये कहने में बिल्कुल भी झिझक नहीं होती है कि ये पूरा समाज केवल और केवल पुरूषों के लिए बना है, जहाँ महिलाओं के भागीदारी तो केवल दिखावटी तौर पर है ∣ अलीराजपुर में एक महिला के साथ की गयी मारपीट हम सब को एक बार फिर ये कहने को मजबूर कर रही है ∣ कि कितना भी ये कह दिया जाए कि नारीवाद के चलते महिला पुरूषों का शोषण कर रही है ∣ पर वास्तविकता में इस आधुनिक समाज में महिलाओं  के  पास अपने अधिकार तक नहीं है ∣ जो एक नागरिक के होने चाहिए महज कुछ अपवाद देखकर हम अक्सर भूल जाए करते हैं कि ये वही समाज है जहाँ निष्कलंक     सीता   के चरित्र पर   प्रश्न किया था  ∣  तो  फिर सामान्य स्त्री के चरित्र पर झूठा लांछन लगाना कौन सी बड़ी बात है ∣ अहा  मेरे गोपांलक  देश ∣

Comments

Popular posts from this blog

Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..