नारी तू नारायणी,नारी तुम शक्ति है ,नारी है तो ये जग सारा है जैसी महान बातें करने वाला ये समाज जब उसी नारी के साथ अन्याय करता है ∣ उसे अपने हाथ की कठपुतली बनाता है ∣ तब ये कहने में बिल्कुल भी झिझक नहीं होती है कि ये पूरा समाज केवल और केवल पुरूषों के लिए बना है, जहाँ महिलाओं के भागीदारी तो केवल दिखावटी तौर पर है ∣ अलीराजपुर में एक महिला के साथ की गयी मारपीट हम सब को एक बार फिर ये कहने को मजबूर कर रही है ∣ कि कितना भी ये कह दिया जाए कि नारीवाद के चलते महिला पुरूषों का शोषण कर रही है ∣ पर वास्तविकता में इस आधुनिक समाज में महिलाओं के पास अपने अधिकार तक नहीं है ∣ जो एक नागरिक के होने चाहिए महज कुछ अपवाद देखकर हम अक्सर भूल जाए करते हैं कि ये वही समाज है जहाँ निष्कलंक सीता के चरित्र पर प्रश्न किया था ∣ तो फिर सामान्य स्त्री के चरित्र पर झूठा लांछन लगाना कौन सी बड़ी बात है ∣ अहा मेरे गोपांलक देश ∣
कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है। आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो।
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