बिन तपे



बिन मांगे कुछ नही मिलता , बिन मौसम बरसात भी बहुत कम ही होती है ∣ फिर हम तो इंसान है बिन परिश्रम के कोई फल कैसे प्राप्त कर सकते हैं ? 

इसमें कोई संदेह नहीं है, कि आज हम जो है वो हमारे भूतकाल का परिणाम है और कल जो हम होगें वो हमारे आज का परिणाम होगा ∣


जिस तरह किसी मिट्टी के घड़े को बनाने के लिए कुम्हार सबसे पहले मिट्टी को अपने पैरों से कूटता है फिर उसे पानी में गलाता है ∣

और फिर देता है आकार उस मिट्टी को घड़े का फिर तपता भट्टी में तब वो लेता है एक मटके का आकार ∣



जिंदगी भी हम सब की ऐसी ही है ∣ जो जितना तपता है, वो उतना चमकता है ∣ और जो नहीं तपता है वो बन जाता है कृष्ण पक्ष की भांति जो केवल काला ही रह जाता है ∣

इसलिए तो कहते हैं महान वो लोग है जो खुद को इतना तपाते है कि जहाँ देखों उनके प्रकाश की ज्योति से हर किसी को प्रेरणा दे जाते हैं ∣ किसे नहीं पसंद सफलता का ताज पर कुछ मेहनत करने वाले लोग ही उसे धारण कर पाते हैं ∣

सफलता और असफलता के भंवर में सब फंसते है महज फर्क इतना होता है कि जो मेहनत करते जी जान से वो सितारे की तरह चमकते हैं ∣

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