माँ की ममता, तो पिता के लाड़ पर कोई कवि कुछ लिख सकता है ∣ एक बच्चे के चंचल से बालपन पर क्या कोई लेखक कुछ रच सकता है ?
गीता का मर्म क्या कोई दुबारा अपने शब्दों में बयां कर सकता है , एक बेटी के विवाह की चिंता में पड़े माँ बाप के दर्द पर क्या कोई कुछ लिख सकता है ?
क्या कोई लिख सकता है, उस घर के बारें में जिसमें उसने लगभग दस सालों तक देखा किन्तु एक समय के बाद अब उसने उस घर को छोड़ा और कहीं बसा लिया अपना आशियाना
क्या उस छोड़े हुए घर पर कोई लिख सकता है ∣ जिसकी खिड़की के कांच में अब चमक नहीं जो घर अब घर नहीं हो गया जो वीरान जैसे कभी कोई उसमें रहा ही नहीं ∣
क्या कोई लिख सकता है, उस बच्चे के नटखट पन के बारें में जिसकी शरारत से कभी उसका दिल नहीं दुखा जिसके साथ उसने अपनी जिंदगी का आधा समय व्यतीत किया ∣
क्या कोई कर सकता है, किसी के बिछड़ने का दर्द बयां शब्दों में जब लगता है शरीर होकर भी अपना शरीर नहीं जैसे दफन वो नहीं अपना शरीर दफन हुआ ∣
उस इच्छा पर कोई कुछ गढ़ सकता है, जो इच्छा कभी भी पूरी न हुई हाथ की मेहंदी रचकर भी रंगीली न हुई ∣
बारिश के मौसम पर कोई शब्द लिख सकता है, जिस बरसात से कभी उसे कुछ ज्यादा ही लगाव था छाता होने के बावजूद भीगता उसका शरीर था ∣
क्या लिखा जा सकता है अपनी जिंदगी में आए उस शख्स के बारे में जिसने झकझोर दिया था तुमको तुम्हारी औकात बता कर रह गए थे तुम सहमे और खत्म कर दिया था तुम्हारे गुरुर को ∣
दुनिया में हर चीज पर लिखा जा सकता है ∣ जिसके होने की तुमने अनुभूति ली हो जिसके छूटने का तुम्हे गम सता रहा हो जिस घर के गेट आज भी सिर्फ तुम्हारी राह देख रहे हो ∣

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