एक स्त्री


 स्त्री भले ही एक छोटा सा शब्द हो किन्तु इसके अंदर समाहित अनेक ऐसी चीजें हैं∣ जो एक स्त्री ही जान सकती है∣

 आज भी खबरों में देख मालूम चलता है∣ कि वो कभी दहेज के नाम पर कभी बेटी होने के कारण मार दी है जाती∣

 जिसे देखकर तो केवल दिल से यही है, अहां निकलती ' न आना इस देश मेरी लाडो ' जहाँ एक स्त्री की जान हमेशा सस्ती है होती∣

 स्त्री करती है हर रोज अनगिनत परेशानी का सामना जिस पर सिर्फ और सिर्फ एक स्त्री की नजर होती है ∣

 हर माह का दर्द कम होता क्या उसके लिए जब उसका शरीर दर्द से करा रहा होता, जो उसे हर माह एक स्त्री होने का बोध है देता∣

 क्या एक स्त्री होना आसान होता है?

 

 जहाँ अनगिनत दर्द उसे सहना है होता जहाँ कभी दहेज तो कभी रंग के कारण उसका अपमान है ह़ोता∣ क्या आज भी आसान होता देश में एक अश्वेत रंग की लड़की का होना जहाँ उसके केवल  उसकी बाहरी सुंदरता में क्यों उसका गौरा होना ही सबकुछ होता∣

 एक स्त्री होने की परिणति तो है कि भले उसे कभी देवी माँ तो कभी लक्ष्मी मानकर पूजा जाता तो कभी ,

 'तेरे मायके ने हमें अब तक दहेज में नहीं दिया ये  इसे कहकर उसका हर दिन शोषण होता∣

 " एक स्त्री होने की परिणति तो है दर्द, सहनशीलता की मूर्ति होना जिस मूर्ति से केवल यहीं अपेक्षा की जाती है∣ कि वो अपने घर की इज्जत बचाकर रखें भले ही हर दिन उसकी इज्जत तार तार होती ∣

  तब भी उन स्त्री को देखकर गर्व है ह़ोता जो चला रही होती अपनी गृहस्थी, तो कभी बैट, कभी ओलंपिक में अपने देश के नाम पर जीत, तो कभी बन जाती पहली अंतरिक्ष पर जाने  वाली महिला तमाम चुनौती के बावजूद अपने देश का सिर गर्व से ऊंचा करती है ये स्त्री ∣ 

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