मिसाल



मिसाल दी जाती है बोली नहीं जाती, दंगल मूवी में एक पिता अपनी बेटी को गोल्ड मेडल जीतने की अहमियत बताता है ∣

जो आज के समय की भी सच्चाई है ,कोई छात्र कितनी मेहनत कर रहा है किसी सरकारी नौकरी को पाने में या किसी बेहतर पद को पाने ये देखना अक्सर लोग भूल जाते हैं ∣ किन्तु अगर उसने गलती कर दी या वो किसी एग्जाम में पास न हुआ तो सब उसे उलाहना देते हैं ∣

जिंदगी की भी यही वास्तविकता हमें एक अलग रूप में दिखाई देती है, जब एक इंसान किसी चीज को पाने के लिए 

कड़ी मेहनत करता है किन्तु वो उसे पा नहीं पाता तो सब उसकी काम करने की काबिलियत पर प्रश्न करते हैं ये नहीं देखते क उसने उसे पाने में कितनी मेहनत की ∣

Comments