जरूरत नहीं कमी बने


हम हमेशा न ए लोगों से मिलते हैं ,जिनमें कुछ लोगों से हमारी अच्छी बन जाती है ∣ हम एक दूसरे के विचार से सहमत होते हैं ∣ और समय के साथ -साथ अच्छे दोस्त में बदल जाते हैं ∣ इस तरह हमारी जिंदगी में दो तरह के दोस्त हो जाते हैं ∣ एक जिनके न रहने से अक्सर हमारी महफ़िल में उनकी खासा कमी महसूस होती है ∣ तो दूसरे वो लोग जिनकी हमें एक समय जरूरत होती है ∣ अब आप सोचेगें आखिर कमी और जरूरत में फर्क ही क्या है ?जबकि इन दोनों शब्दों में जमीन आसमान का फर्क होता है ∣ जरुरत हमेशा किसी न किसी से पूरी की जा सकती है ∣ किन्तु कमी पूरी नहीं की जा सकती है ∣

अगर हम इसे उदाहरण से समझें तो जानेगें, हमारा कोई ऐसा दोस्त जिसके बिना एक समय हम ने सुबह को सुबह न कहा हो सब आ गए हो पर वो न आए हो, तो हमारा ध्यान केवल उसके आने पर उस चीज की कमी केवल वो ही दूर कर सकता है ∣ जबकि अगर हमारा कोई दोस्त हो जिसके एक समय हमारी जरूरत हो तो उसे तो कोई भी पूरा सकता है ∣ आपके होने न होने से सामने वाले को क़ोई फर्क नहीं पड़ता है ∣ इसलिए किसी की कमी बने जरूरत नहीं ∣

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