ऐसे ही नहीं लिखा ध्रुवस्वामिनी पर जयशंकर ने नाटक



गुप्त वंश में चंद्र गुप्त से सबका परिचय है किन्तु इस वंश  की सबसे प्रभाव शील ध्रुवस्वामिनी को बहुत कम लोग ही जानते हैं ∣

जिनके विषय पर आज बात करना जरूरी है ∣ आज देश में नारीवाद बहुत सुर्खियों में चल रहा है, किन्तु वो तो गुप्त काल में उसी समय आ गया था जब गुप्त वंश की महारानी  ध्रुवस्वामिनी

अपने  पति रामदेव का स्त्री को वस्तु समझने की भूल करने में भरी सभा में चंद्र गुप्त को ये आदेश दे दिया था कि वो अपने भाई रामदेव का वंध कर दे ∣

जिसका कारण यहाँ था कि रामदेव गुप्त ने अपनी आजादी के बदले अपनी पत्नी को अपने से जीते हुए राजा के पास सौपने को तैयार हो गया था किन्तु ध्रुवस्वामिनी  जो कि चंद्र गुप्त से प्रेम करती थी उस ने  चंद्र गुप्त से स्पष्ट तौर पर कह दिया था कि वो नहीं उसकी लाश वहाँ जाएगी ∣ उस समय गुप्त शासन के राजा रामदेव थे उस समय चंंद्र गुप्त ने ध्रुवस्वामिनी

का वेश धारण करके उस राजा का वध किया था और जब वो गुप्त साम्राज्य में आए थे तब रामदेव ने चंद्र गुप्त को बंंदी बना लिया था उस समय ध्रुवस्वामिनी ने भरी सभा में चंद्र गुप्त को आदेश दिया था "ऐसा राजा राजा कहलाने के लायक नहीं जो अपनी धर्मपत्नी के बदले अपनी आजादी मांगी हो उस समय चंद्र गुप्त ने उनका वंध कर दिया था और  ध्रुवस्वामिनी  के आदेशनुसार गुप्त साम्राज्य का राजा बन गए थे ∣ (हालांकि उन्हें राजा बनने की परीक्षा पहले से पास कर ली थी किन्तु अपनी छोटी माँ के खुशी के चलते उन्हें राजा बनने की परीक्षा में कुछ सवालों का जबाव गलत दे दिया था जिसे की उनका भाई रामदेव राजा बन जाए) 

और फिर   ध्रुवस्वामिनी  ने सभी नारियों की आजादी को लेकर सभा में कहा कि पुन : वेदों को लिखा जाए जिसमें महिलाओं को अपने वर चुनने की स्वतंत्रता हो और वो किसी की वस्तु न हो ऐसे सभी लोग जो स्त्री की आजादी से नफरत करते हैं उन्हें दण्ड दिया जाए ∣ "

ध्रुवस्वामिनी

ने गुप्त साम्राज्य में व़ो इतिहास लिख दिया जो हर नारीवाद की आजादी का हमेशा ऐसा साक्ष्य रहेगा जिसे कभी मिटाया न जा सके ∣ 



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