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वो क्लास रूम नहीं होता



जब किसी भी संस्थान में नौकरी करने जाओ या इंटर्नशिप करने जाओं तब मालूम चलती है |खुद की औकात क्या हो तुम वहाँ भले आपकी टांग खिचने वाला क़ोई न हो किन्तु आपसे प्रतियोगिता कर रहे बहुत सारे अनजान लोग होते हैं ∣ जहाँ रेस लगी हुई होती है| इस बात की कौन इस काम को जल्दी करेगा जहाँ अपने कितना काम अब तक किया है|


 उसका संग्रह आपको ही गूगल शीट या एक्सल में करना होता है| वहाँ भले ही आपको बताने वाले आपसे रोज गूगल मीट पर न मिले किन्तु जब मुलाकात होती है| तो वो आपके हाल चाल नहीं आपके काम को पूछते हैं ∣ जहाँ ये नहीं देखा जाता है| कि आप क्या हो जहाँ तो केवल आपका काम देखा जाता है जहाँ आपको अपना रिजल्ट खुद ही बताना होता है कि अब तक क्या दिया अपने इस संस्थान को जहाँ पर कोई टीचर से नजर चुराने वाला विद्यार्थी नहीं होता है |

जहाँ आपकी ताकत होती आपकी ईमानदारी कि कितना अच्छा काम करते हो आप जहाँ आपका रिजल्ट भले क्लास के गुप पर फोटो में न बनकर हो पर एक खास मीटिंग में सबका रिजल्ट एक साथ है ओपन होता स्कूल की पढ़ाई में हम पढ़ते अपनी कक्षा का टॉपर्स बनने के लिए , कॉलेज में आते तो कोशिश होती' मिस एक्सीलेंस' बनने की किन्तु जब किसी संस्थान में नौकरी करने जाते तब मालूम चलता वास्तविक जीवन का क्लास रूम तो असली में हमारा एक पेशेवर प्राप्त किया हुआ अनुभव होता| 

जहाँ भले आपके किसी दोस्त की तरह आपसे ईर्ष्या करने वाले लोग न हो किन्तु प्रतियोगिता कौन कितना बेहतर है| ये दिखाने के लिए हर कोई अपने काम से इसमें जीतने के लिए शिरकत होता |

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