कोई भी चीज़



 अक्सर हम दूसरे की कामयाबी देख उससे ईर्ष्या करने की नासमझी कर देते हैं ∣ हमें लगता है कि उसने कितना कुछ पा लिया है ∣ और हम तो वही है ∣ जहाँ पर पहले भी थे हम उसके बारे में पूरी तरह से तहकीकात करे बिना ही ये कह देते हैं कि कितना सुंदर जीवन है बिना परिश्रम के ही सबकुछ मिल गया

 जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत होती है दुनिया में कुछ लोग ह़ोते है ∣  ज़ो जिंदगी से सिर्फ शिकायत करते रह जाते हैं जबकि कुछ लोग अपने आप को परिष्कृत करने के लिए हर संकट झेल जाते हैं∣

 क्या ऐसे ही मिल जाती है कामयाबी नहीं इसे पाने के लिए अक्सर लोगों को करना पड़ता है परिश्रम∣

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