वक्त के बीत जाने में





अक्सर जिंदगी में हमें उस खुशी का अंदाज़ा ही नहीं होता है    जिसे हम हर दिन तोड़े सुख दुःख के साथ जीते हैं ∣  

 जिसके एक पल बिछड़ जाने से हमें उसके दूर होने का दर्द होता है ∣

सूरज भी जब ढलने लगता है तो वों प्रकाश करता है किन्तु जिंदगी में किसी का साथ पीछे छोड़ देने का पर क्या वो जाते -जाते चमकता है? 

नहीं, जिसका ख्याल जिंदगी में हम उस पल नहीं करते उसके पीछे  छूट जाने पर सबसे ज्यादा वो पल ही सिर्फ याद रहता है.

जब उन यादों को हम वास्तविकता में जीते हैं तो उसका महत्व हमें कहाँ मालूम चलता है ?

जैसे- इसमें क्या ही सुख है सिवाय कष्ट के ,

किन्तु जिंदगी में उससे बिछड़ने के बाद ही उस खास लम्हे का महत्व मालूम होता है 

जिंदगी में रह जाता है हर दिन सोना- जगना, 

छूट जाता है तो कुछ लोगों का साथ , 

जिंदगी को जितना हम जीते हैं हम उतना ही जिंदगी से सीखते हैं

रह जाती है एक सपने की तरह खट्टी -मीठी यादें जिन्हें हम एक पल जीते हैं 

हर वक़्त बीतता है जब ये हम सोचने बैठते है उस पल को तो केवल यादें ही रह जाती फोन की गैलरी में , 

न होती याद न होते किस्से रह जाती जिंदगी एक कशमकश बनकर, 

टूटता हुआ पेड़ में क्या नहीं करता प्रश्न क्यों काटा जा रहा है   जैसे हर मखोल केवल उसका ही उड़ाया जा रहा है  ∣

वैसे ही सच ही है जिंदगी की आबोहवा ही कुछ ऐसी होती हैं जब उस पल को जीते है हम तो तसल्ली कम ही होती है जब बीत जाता है पल तो सिर्फ सिर्फ तसल्ली ही रहती है  

सुकून भी एक पल के बाद काटने सा लगता है अक्सर हसमुख इंसान का मौन क्या अच्छा साबित होता है

यादें नहीं मिटती, गम हो जाता भले

कम

एक पल के बाद 

सब खो जाता 

जानें किस कल में.



   

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