एक तरफ आती बारात
है
तो दूसरी तरफ पसरा
मातम है
एक तरफ सजती दुल्हन
दूसरी तरफ एक सुहागन का
बिखरा सिंदूर
है
एक तरफ बेखर होते बच्चे
दूसरी तरफ बनता परिवार है
एक जगह बजते नगाड़े
दूसरी तरफ
रोने का शोर है
एक ओरभूख से खिलबिलाते बच्चे
तो दूसरी ओर
सामंतों के घर पर
अन्न भरपूर है
जिंदगी की सच्चाई
रूबरू होने का दर्द ही अलग मशहूर है.
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