अक्सर हमें लगता है कि जिंदगी कितनी आम है ∣ रोज का सोना जागना, और अपनी दिनचर्या को पूरा करना
किन्तु हर दिन अगर आज जैसा हो तो बात ही क्या हो पर ऐसा होता कहाँ है आज से हमारा दिन भले थोड़ा ही अलग हो किन्तु होता जरूर है जिसका पता हमें तब मालूम चलता है जब वो बदलाव अपना आकार बढ़ाने लगता है
जिंदगी भी ऐसी ही है ∣ हर दिन हमें एक नया विचार तो सोचने को एक नया विषय देती है ∣ कभी किसी शाम हम अपनी जीत का जश्न तो कभी हार का दुख मना रहे होते हैं ∣
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