अक्सर जब हमारे पास समय होता है ∣ तो हमें उसकी कीमत नहीं होती है ∣ तब हमें समझ ही नहीं आता है कि हम उसका उपयोग किस तरह से करे
किन्तु उसके विपरीत जब हमारे जीवन में किसी कारण थोड़ी व्यस्तता आती है ∣ तो केवल हम अपने साथ पछतावा ही रख पातें है ∣ कि उस समय क्यों हमने समय का उपयोग नहीं किया जब हमें समय में मिला था ∣
उसी तरह हमारी जिंदगी है जब हम उसे नहीं समझते तो वो हमें बोझ लगने लगती है ∣ और जब हम उसे गहराई से समझने लगे तो हम ही उससे दूर जाने लगते हैं ∣ और अनिश्चितता के भंवर में ऐसे फंस जाते हैं ∣ कि समय का पता ही नहीं रहता है कब हफ्ते, महीने और सालों निकल जातें हैं ∣
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