अब नहीं समझोगें तो कब



धिकार की बात करने वाले

कर्तव्य पर चुपी साध लेते हैं

अक्सर जब बात आए

महिलाओं के अधिकारों की तो

मुंह बंद कर लेते हैं ∣


नहीं जानते क्या तुम इतिहास

रानी लक्ष्मीबाई का

जिसने चलाए शस्त्र

किया युद्ध

बचाने भारत की भूमि को

क्या भूल गए तुम अहिल्याबाई


बाई होल्कर को

जिसे पढ़ने के लिए देनी पड़ी थी

परीक्षा पूछा गया था

उससे कठिन पहेली का उत्तर

एक सिक्के में क्या भर सकते हो तुम

एक कमरे को ? 

दिया था, अहिल्याबाई ने क्या खूब उत्तर

एक दीपक से कर दिया था प्रकाश

सारे कमरे पर


क्या अब तुम हो अनजान

नारी की महिमा से

जो उठाते सवाल उनकी काबिलियत पर

जरा पूछों

खुद से सवाल  काबिल हो तुम  उनसे

प्रश्न करने के लिए

जो हमेशा हर चीज को पहले लिए

कहते हैं

बराबरी सब की होनी चाहिए

भले ही हर बार हो परीक्षा केवल

नारी की ∣


अब नहीं समझोगें तो कब तुम्हारे पढ़ने से घर में आएगी डिग्री

उनके पढ़ने से होगा शिक्षित

समाज और सुधरेंगी जीवन शैली ∣ 


Comments