जिंदगी में हम पेशेवर रूप में किस जगह पर खड़े है और उम्र के किस पड़ाव में है ∣ ये हम अक्सर ध्यान देते हैं ∣
किन्तु एक अरसे के बाद हम भूल जाते हैं ∣ जिंदगी में बहुत को पीछे छोड़ आते वक्त से ज्यादा आगे आते हुए हम खुद में खो जाते हैं ∣ हमें मतलब नहीं होता है हमारे उस दोस्त से जिसके साथ हम ने पहली क्लास पढ़ी थी हम अनजान हो जाते हैं ∣
जिसके साथ हमने जीने मरने की कसमें खायी थी ∣ वो टीचर भी हमें एक समय के बाद याद नहीं होता है ∣ जिसके नाक में दम करने में हमने कोई कसर न छोड़ी थी वो क्लास बंक करने वाले दोस्तों की भी हमने फिर कभी जानकारी नहीं ली जिनके चलते हमने कभी जिंदगी की कुछ खुशी चुराई थी
वो कॉलेज में बना सबसे अच्छा मित्र उसके बारे में पूछने की हमने कोई जरूरत ही नहीं समझी थी ∣
उस टीचर को जिससे हमने तो कॉलेज में भी डांट खायी थी ∣ न पूछे सके कभी दुबारा उसके बारे में जिसने हमारी खूब लगाई थी ∣
सबकुछ पहले से शुरू हो ये हम सब की दिली ख्वाहिश रही ∣ किन्तु हम ये जानना ही भूल गए कि जो इतना सब धूम धड़के के साथ शुरू हुआ ∣ वो खत्म कैसे हो गया हम में तो केवल
आगे वाले की याद आयी थी ∣

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