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क्या पर्यावरण को भूल चूके है आज हम ?

 


जहाँ एक तरफ पूरा  विश्व कोरोना  वायरस की महामारी से जूझ रहा है वहीं दूसरी तरफ कई  देश  आपदा जैसी  चीजों  को झेल रहे हैं.

जिसमें  बाढ़ ,भूकंप   जैसी  घटनाएं  शामिल  है    जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण  बिहार   और  असम में आयी बाढ़ से हम देख  सकते हैं 

एक आंकड़ों के मुताबिक असम  के  काजीरंगा नेशनल पार्क   में अब तक  116 वन्यजीवों की जान जा चुकी है और   अब मेघालय में बाढ़ का कहर शुरू हो गया है  आपकी जानकारी के लिए आपको बता दे कि ब्रह्मपुत्र नदी का पानी 175 गांवों में पहुँच  गया है जिससे 1.7 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए है वहीं  90 फीसदी डूबे  असम के  काजीरंगा नेशनल पार्क   में अब तक  116 वन्यजीवों की जान जा चुकी है .

तो वहीं दूसरी तरफ  बिहार के चंपारण जिले में उफनी  गंडक नदी के बाढ़  का पानी जिले के करीब 70 गांवों में फैल गया .

इसके विपरीत  रूस के साइबेरिया में  जंगलों की आग फैलती जा रही है 

रूस की एरियल फारेस्ट प्रोटेक्शन सर्विस के अनुसार 99  हजार एकड़  में 197 जगह पर आग फैली है 5000 से ज्यादा लोग इन्हें बुझाने में लगे हैं

वहीं दूसरी ओर अमेरिका के कैलिफोर्निया में भी आग  फैली  हुई है

अब फैसला हम सब को करना है कि क्या हमें ऐसी आधुनिकता चाहिए जहाँ हम प्रदूषण के कारण न तो सांस ले पाएं, और न ही प्रकृति की सुंदरता बरकरार रख पाएं.

जहाँ आज भारत केवल आधुनिकता बनाम पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने अपने महत्वपूर्ण योगदान  दे रहा है वहीं आज महात्मा गांधी का कथन पर्यावरण को लेकर बिलकुल सत्य  लग रहा है कि पर्यावरण एक इंसान को सबकुछ दे सकती है पर एक लालची इंसान को कुछ भी नहीं.

आज हमारे लालच के कारण ही हमारी स्थिति इस तरह की हो रही है अगर हम और विनाश नहीं चाहते तो हमें ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने चाहिए क्योंकि पेड़ न केवल हमें वस्तु उपलब्ध करता है बल्कि वो मिट्टी को बांधे रखती है जिसके कारण बाढ़ आदि को रोका जा सकता है .



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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..