जिसमें बाढ़ ,भूकंप जैसी घटनाएं शामिल है जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण बिहार और असम में आयी बाढ़ से हम देख सकते हैं
एक आंकड़ों के मुताबिक असम के काजीरंगा नेशनल पार्क में अब तक 116 वन्यजीवों की जान जा चुकी है और अब मेघालय में बाढ़ का कहर शुरू हो गया है आपकी जानकारी के लिए आपको बता दे कि ब्रह्मपुत्र नदी का पानी 175 गांवों में पहुँच गया है जिससे 1.7 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए है वहीं 90 फीसदी डूबे असम के काजीरंगा नेशनल पार्क में अब तक 116 वन्यजीवों की जान जा चुकी है .
तो वहीं दूसरी तरफ बिहार के चंपारण जिले में उफनी गंडक नदी के बाढ़ का पानी जिले के करीब 70 गांवों में फैल गया .
इसके विपरीत रूस के साइबेरिया में जंगलों की आग फैलती जा रही है
रूस की एरियल फारेस्ट प्रोटेक्शन सर्विस के अनुसार 99 हजार एकड़ में 197 जगह पर आग फैली है 5000 से ज्यादा लोग इन्हें बुझाने में लगे हैं
वहीं दूसरी ओर अमेरिका के कैलिफोर्निया में भी आग फैली हुई है
अब फैसला हम सब को करना है कि क्या हमें ऐसी आधुनिकता चाहिए जहाँ हम प्रदूषण के कारण न तो सांस ले पाएं, और न ही प्रकृति की सुंदरता बरकरार रख पाएं.
जहाँ आज भारत केवल आधुनिकता बनाम पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने अपने महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है वहीं आज महात्मा गांधी का कथन पर्यावरण को लेकर बिलकुल सत्य लग रहा है कि पर्यावरण एक इंसान को सबकुछ दे सकती है पर एक लालची इंसान को कुछ भी नहीं.
आज हमारे लालच के कारण ही हमारी स्थिति इस तरह की हो रही है अगर हम और विनाश नहीं चाहते तो हमें ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने चाहिए क्योंकि पेड़ न केवल हमें वस्तु उपलब्ध करता है बल्कि वो मिट्टी को बांधे रखती है जिसके कारण बाढ़ आदि को रोका जा सकता है .
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