राजकुमार केसवानी



राजकुमार केसवानी जो हर उस पत्रकार, लेखक के लिए प्रेरणा थे जो अपने पाठक को देखकर लेखन करा करते थे। जिनकी शख्सियत इतनी खास थी  ।  कि एक बार कोई उन्हें देख ले तो उनकी शक्ल को न भूले जिनकी 

लेखनी हर किसी को बहुत प्रभावित करती थी  ।  जिन्होंने गैस कांड से पहले ही प्लांट की गड़बड़ी की सूचना शासन को देने की कोशिश की थी  ।  किन्तु अफसोस किसी ने उनकी बात न सुनी फिर उन्होंने

उसकी खराबी के लिए लेख लिखना शुरू हो गया किन्तु अफसोस वो भोपाल को गैस त्रासदी की लपटों से बचा नहीं पाएं  , जिसने भोपाल की शक्ल बिगड़ा दी ।

बात चाहे अखबार निकालने की हो या खबर लिखने की वो अपना काम इतने बेहतर ढंग से करते थे  । कि आज भी जब पाठक उनके रसरंग के  कॉलम  में फिल्मी दुनिया पर आएं लेख को पढ़ने की बात आती थी ।  तो वो इसका बेसब्री से इंतजार करते थे कि कब आएगा इतवार जब करेगें वो अपने पसंदीदा लेखक के लेख दीदार आज वो लेखक वो पत्रकार हमारे बीच में नहीं है किन्तु फिर वो भी हमारे बीच में मौजूद है कही मुगले आजम की किताब में लिखे हुए छोटे किस्सों में जिसमें उन्हें उस फिल्म के बारें इतनी बारीक जानकारी पेश की है ∣ कि हर मुगले आजम प्रेमी को उनकी लेखनी से इश्क हो जाए या फिर चाहे बात उनके बोलने और उनके टेलीविजन से नजर चुराते हुुए हो  उन्होंने   हमेशा अपने से ज्यादा अपने पाठकों के बारे में सोचा जन सरोकार की पत्रकारिता की  । 



ऐसी शख्सियत के लिए क्या लिखे एक 

मामूली शख्स जिसकी लेखनी ने किया

सबके दिलों पर राज

आज भले 

न हो वो हमारे बीच 

किन्तु उनकी लेखनी और किस्सों ने

सबके दिलों पर किया राज


( हर इंसान को नहीं होती जिंदगी की इतनी परवाह अक्सर कुछ खुदा के बंदे ही करते हैं रोशन किस के घर का कोना)  ।

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