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रौद्र





"श्री कृष्ण सुने वचन 

अर्जुन क्रोध जलने लगे 

सब शोक अपना भूलकर

करतल युगल 

मलने लगे

संसार अब देखों 

मेरे शत्रु रण में मृत पड़े

करते हुए घोषणा वो उठकर खड़े."


हिन्दी साहित्य में रस का बहुत महत्व है ∣ यहाँ तक की तुलसीदास के द्वारा लिखित रामचरितमानस में भी सभी रस को उपयोग किया जाता है ∣

जिनमें श्रृंगार, भयानक और वात्सल्य , रौद्र रस की अहम भूमिका है ∣

 रौद्र रस जिसका स्थायी भाव 

क्रोध है ∣

जिससे सबसे अच्छे से परिभाषित रामचंद्र शुक्ल ने अपने 

निबंध क्रोध में किया है ∣ जो कालजयी निबंध हुआ है ∣

आज वर्तमान समय में जब देश की आधी आबादी स्वास्थ्य क्षेत्र की बदहाली के चलते अपनों को खो रही है 

हर जगह राग दरबारी का स्वर है ∣

तब आम जनता में शासन के प्रति ही एक अलग आक्रोश है ∣




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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..