"श्री कृष्ण सुने वचन
अर्जुन क्रोध जलने लगे
सब शोक अपना भूलकर
करतल युगल
मलने लगे
संसार अब देखों
मेरे शत्रु रण में मृत पड़े
करते हुए घोषणा वो उठकर खड़े."
हिन्दी साहित्य में रस का बहुत महत्व है ∣ यहाँ तक की तुलसीदास के द्वारा लिखित रामचरितमानस में भी सभी रस को उपयोग किया जाता है ∣
जिनमें श्रृंगार, भयानक और वात्सल्य , रौद्र रस की अहम भूमिका है ∣
रौद्र रस जिसका स्थायी भाव
क्रोध है ∣
जिससे सबसे अच्छे से परिभाषित रामचंद्र शुक्ल ने अपने
निबंध क्रोध में किया है ∣ जो कालजयी निबंध हुआ है ∣
आज वर्तमान समय में जब देश की आधी आबादी स्वास्थ्य क्षेत्र की बदहाली के चलते अपनों को खो रही है
हर जगह राग दरबारी का स्वर है ∣
तब आम जनता में शासन के प्रति ही एक अलग आक्रोश है ∣

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