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World Art day


साहित्य क्या करता है,क्या करती है? उसकी कलाएँ

निर्मल वर्मा का यहाँ निबंध हमें कला के महत्व को बताता है ।
कि किताब के होते तो काले काले शब्द है किन्तु व़ो हमें लगातार पढ़ने को विवश करती है । यहीं तो साहित्य और उसकी कलाएँ
जब हम उसे पढ़ते हैं  तो हम उस वक्त अपने जीवन में आयी हर परेशानी को भूलकर केवल
उसे लगातार पढ़ते जाते हैं।

ये वही कला है  ज़ो मनुष्य को भीड़ से अलग बनाती है
आज विश्व कला दिवस है जिसका उद्देश्य कला को बढ़ावा देना है साथ ही इसका महत्व हमारे जीवन में कितना है उसे बतलाना    है।
इस दिन कला के विषय पर सगोष्टी भी और सेमिनार भी किया जाता है।
जीवन को बेहतर ढंग से जीना भी एक कला है जो हर किसी के पास नहीं होती 

लिखने की कला का क्या कहना  लिखने वाला भले हमारे बीच में भौतिक रूप में मौजूद न हो किन्तु इसकी लेखन की कला के चलते वो लेखक पाठकों के दिल में हमेशा जिंदा रहते हैं।  लिखना क्या आसान होता है? क्या कुछ ऐसे ही लिखा जाता है, नहीं
बोलने की कला में माहिर लोग अक्सर बहुत नाम कमाते हैं जो लोग भले हमारे बीच न रहे एक समय के बाद किन्तु उनके अल्फाज हमेशा हमें याद रह जाते हैं
गाने की भी एक कला होती है क्यों हजारों गीत में हमें कुछ गीत ही केवल याद रह जाते हैं ।
नाटक करने की भी एक कला ही तो होती है क्यों कुछ किरदार की एकटिंग हमें इतनी पसंद आ जाती है  ये कला ही तो जब व्यक्ति खुद को भूल दूसरे के किरदार में घुस जाते हैं ।
चित्र बनाने की भी तो एक अद्वितीय कला होती है
आज समकालीन समय में जब देश में कोरोना वायरस का प्रकोप भारत में चारों तरफ फैल रहा है।  ऐसे में वो लोग जो कोई ऐसी कला को जानते हैं जिसकी आज बहुत मांग है । तो ऐसी कला को हम परिष्कृत करें
जिससे हम उसे अपने पेशेवर जिंदगी में ला सके
किन्तु इसमें एक और चीज को ध्यान देना बहुत जरूरी है।  कि अगर किसी चीज को अपना एक से आधे घंटे करके ऊब जाते हैं तो हमें उस अपने जीवन में पेशेवर जिंदगी में लाने से पहले सोचना चाहिए ।


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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..