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World creativity and Innovation Day




सृजन करना बिल्कुल उस तरह से ही है जिस तरह एक स्वेटर को बुनना  है जिसमें उसके हर हिस्से की लंबाई का नाप  इतना सावधानी से लेना है   कि उसकी एक सिलाई भी ज्यादा कम न लग जाए जिससे स्वेटर की बनावट खराब ह़ो जाए उसी तरह किया जाता है  हर चीज का सृजन भले फिर वो शब्दों को क्यों न गढ़ कर एक रचना करना हो ।

क्या ऐसा ही हो जाता है सृजन इसका उत्तर है नहीं, बरसों लग जाते हैं व्यक्ति को किसी चीज का सृजन करने में जिसमें उसे अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय देना होता है  ठीक उसी तरह जिस तरह एक घर बनाया जाता है। जिसमें सबसे पहले एक घर का नक्शा तैयार किया जाता है। जिसे लेखन में रूप रेखा कहीं जाती  है। फिर उसके हिसाब से घर को एक आकार दिया जाता है जिसे प्रस्तावना कहते हैं फिर उसमें ये निर्णय लिया जाता है कौन सा कमरा कितना बड़ा और कितना छोटा रखना है जिसे लेखन में चरित्र चित्रण कहते हैंं। फिर उसे बनाना प्रारंभ किया जाता है जिससे कथावस्तु कहते हैं और फिर अंत में उसका उद्देश्य चुना जाता है  

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