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कोरोना का बढ़ना कही किसी की गलती तो नहीं


एक बार फिर देश में कोरोना वायरस के केस बढ़ने लगे जिसके चलते क ई राज्य में नाइट कफ्यू  लगा दिया तो कही 

तो कुछ दिन के लिए लॉकडाउन  शुरू कर दिया गया

इस स्थिति को देखकर मन सिर्फ एक ही 

  प्रश्न पूछ रहा है कि कोरोना के केस बढ़ने के कारण क्या है? 

जिसमें सबसे पहले योगदान हम ही दे रहे  हैं जब बाहर कही जाते हैं तो मास्क गलती से लगा भी ले तो हम सामजिक दूर का पालन नहीं करते  वही दूसरा कारण चुनावी रैली जो हर चुनावी राज्य में की जा रही है जहाँ पर भारी संख्या में लोग  एक जुट  हो रहे हैं जहाँ न तो किसी सामजिक दूरी का पालन किया जा रहा है न ही चुनावी रैली करने वाले लोगों के द्वारा मास्क लगने का सन्देश ज़ो हमें जैसी राजा वैसी प्रजा की उक्ति कहने को मजबूर कर रहा है 

अगर हम 

 कोरोना वायरस की लहर से बचना चाहते हैं तो सबसे पहले सभी चुनावी राज्य में कोरोना वायरस को लेकर जो गाइडलाइन बनी  है उसे किसी भी कीमत पर राजनीतिक रैली पर भी लागू करना होगा साथ ही चुनाव कर रहे नेताओं को स्वयं मास्क पहनकर रैली करनी होगी क्योंकि कोरोना ये नहीं देखता कि चुनाव प्रचार कर रहे राजनेता किस तरह मीडिया के सामने आते ही कोरोना वायरस के बढ़ते केस पर अपनी चिंता   व्यक्त करते हैं जबकि स्वयं कोरोना की गाइडलाइन्स का मजाक उड़ाते हैं

वहीं दूसरी ओर आम जन को ये समझना होगा कि अगर हमें अपने काम क़ो लगातार करते रहना है  जिसे हमारी रोजी रोटी चल सके तो इसके लिए जरूरी है कि हम अपने दिमाग में ये बात बैठा ले कि कोरोना का बढ़ना हमारी जेब को पूरी तरह से कटना है 

 अगर हम सब को पुनः 

 वो तस्वीर  नहीं चाहिए जिसमें भूख से बिलखते बच्चे रोटी को तरस रहे हैं आधे लोग शहर से गांव की ओर पलायन करे तो हमें सतर्कता बरतनी होगी.

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..