अच्छी यादें


सुबह नींद खुलने से पहले कोई आपको तोतली आवाज में तुतलाते हुए ये कहकर उठाए चलों खेले

उस वक्त कौन इतनी हिमाकत कर सकता है कि उससे ये बोले की नहीं 

अभी सोने दो और जब उठे तो उस पर गुस्सा आने की जगह उस पर स्नेह की धार सी बहे 

और फिर अपने काम को करने में लग जाए पेपर पढ़ने जैसे काम से और फिर जब वो पुनः आपके पास आकर कहें जेका जेका है तो आपको भले उस वक्त थोड़ा गुस्सा सा आए किन्तु उस डाटने का मन भी न करे और फिर उसे बताने में लग जाए जे सोना लड़की है जै अगरबत्ती है जे जे है और वो अपनी जिज्ञासा में और सभी प्रश्न को पूछती चले जाएं और उसे बताते चले जाए फिर अपने दूसरे काम में लग जाए और जब खाने के वक्त वो आ जाए तो केवल उसे परेशान करने के लिए इतना भर कहा द़ो सोना तुमने नहाया नहीं 

और व़ो कहे मम्मी कपड़े धो रही है मौसी और फिर उसके उसके मुंह पर लगे जूठ को हटाते हुए उसके मुंह को साफ करना और फिर उसके लिए एक छोटी सी थाली लगाना और फिर दोनों साथ में बैठकर खान खाए इसके पश्चात जब वो भरी दोपहर में घर आए तो म न न चाहते हुए उसे ये कहे सोना शाम क़ो आना और फिर उसका घर को चले जाना शाम को जब अपने सभी काम को करके खाली हो तो उसके साथ टीचर -टीचर, घर- घर खेलना और जब उसे कविता सुनाने को कहना तो उसकी नटखट बातें से हंसी सी आ जाना कविता कविता कविता मौसी कविता तो नहीं आती उसे डांट लगना अभी तो सि खाई थी कविता और फिर तुम उसे भुल गयी और फिर मछली जल की रानी हम दोनों का साथ साथ बोलना और ये कविता को पूरी करते हुए उसे शाबशी देना और कहना तालियां सोना के लिए 

और ऐसा घर दिन उसके साथ अपना जीवन काटना उसके साथ रहते हुए हर चिंता भूलना मानों आज जब उससे जुदा हुई ही उसे बहुत दूर आ गयी हुं तो ऐसा लगता है जैसे में किसी चीज को भूल रही ही वो दिन भले उस समय सामान्य से लगते थे किन्तु आज वो

दिन याद आते है तो जी करता है फिर उस दिन में लौट जाऊं किन्तु क्या कोई भी जिंदगी की इस सच्चाई से मुंह फेर सकता है सारे सुखों की कल्पना करना मूर्खपना है

अब भी लग रहा है मेरी सोना से मुलाकात होनी ही वाली है

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