बहुत कुछ नहीं लिख पाता
सफल होते हैं तो
उस पर लिख देते हैं
पर हार जानें पर आसूं
क्या लिख पाते हैं,
शिखर पर जब चढ़ जाते
तो बहुत शब्द लिख जाते हैं
किन्तु नहीं लिखा जाता
शिखर तक चढ़ने के बीच का संघर्ष,
लगातार गिरने के बावजूद उठने की चाह
हर दिन खुद को तोड़कर
जोड़ने की चाह,
केवल हम लिख पाते
जो थोड़ा बहुत महसूस करते
हर पल जो महसूस करते
क्या हम उसे लिख पाते ,
जिसे हर वक़्त जीने के बावजूद
खुलकर जी नहीं पातें
हंसकर हंस नहीं पाते
रोककर रो नहीं पातें है
कुछ लिख जाने के बावजूद
नहीं लिख पाते.
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