हम अपनी सीमा स्वयं चुनते है


कई बार हम किसी नयी चीज को करने से पहले ही डर से जाते हैं और ये सोचकर मना कर देते हैं कि हमसे तो वो होगा ही नहीं 

और यही शुरू हो जाता है हमारा स्वयं से संघर्ष एक मन कहता है  हम उसे कर सकते हैं एक मन कहता नहीं कर सकते तीसरा मन होता है करके तो देखे होता है क्या हमारा जीवन अनिश्चित से भरा है जहाँ अनेक चीजें हैं हमें देखने  और समझने को किन्तु फिर भी कही कही हमने अपनी सीमा सी चुन ली है कि हम केवल यही काम करेगें दूसरा कोई भी नहीं

आज बदलते दौर में अगर हमें कुछ बेहतर पाना है तो हमें अपनी सीमा से बाहर निकलना होगा और इसके और भी परिप्रेक्ष्य को देखना समझना होगा ठीक उसी तरह जिस तरह हम अपने फोन में केवल

फेसबुक या गूगल नहीं चलाते बल्कि हम हर  चीज देखते और कभी कभी तो हम अपने फोन के हर साफ्टवेयर एप को खोलकर ये ही देखते हैं कि ये कैसे  काम करता है.

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