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हम अपनी सीमा स्वयं चुनते है


कई बार हम किसी नयी चीज को करने से पहले ही डर से जाते हैं और ये सोचकर मना कर देते हैं कि हमसे तो वो होगा ही नहीं 

और यही शुरू हो जाता है हमारा स्वयं से संघर्ष एक मन कहता है  हम उसे कर सकते हैं एक मन कहता नहीं कर सकते तीसरा मन होता है करके तो देखे होता है क्या हमारा जीवन अनिश्चित से भरा है जहाँ अनेक चीजें हैं हमें देखने  और समझने को किन्तु फिर भी कही कही हमने अपनी सीमा सी चुन ली है कि हम केवल यही काम करेगें दूसरा कोई भी नहीं

आज बदलते दौर में अगर हमें कुछ बेहतर पाना है तो हमें अपनी सीमा से बाहर निकलना होगा और इसके और भी परिप्रेक्ष्य को देखना समझना होगा ठीक उसी तरह जिस तरह हम अपने फोन में केवल

फेसबुक या गूगल नहीं चलाते बल्कि हम हर  चीज देखते और कभी कभी तो हम अपने फोन के हर साफ्टवेयर एप को खोलकर ये ही देखते हैं कि ये कैसे  काम करता है.

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..