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जानें माखनलाल चतुर्वेदी के बारे में


आज ही के दिन मध्यप्रदेश की धरती पर एक लेखक, एक पत्रकार एक स्वतंत्र विचार वाला व्यक्ति पैदा हुआ जिसने अपनी लेखनी से वो लिख दिया जो आज स्वतंत्रता के बावजूद लिखना सम्भव नहीं है

माखनलाल चतुर्वेदी बचपन से ही कुछ अलग करने की सोचते थे किन्तु कहते हैं नियति का भी अदभुत खेल होता है कब कहाँ ले जाए किसी को नहीं, मालूम माखनलाल चतुर्वेदी ने एक शिक्षक के रुप में अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत की कुछ समय के बाद उन्होंने एक निबंध प्रतियोगिता के लिए गणेश शंकर विद्यार्थी को अपना निबंध भेजा जिसमें उन्हें प्रथम पुरूस्कार मिला इसके बाद उन्होंने शिक्षण कार्य को छोड़कर लेखन की ओर बढ़ना शुरू किया 

उनके पहले ही लेख ने उनको पुरूस्कार स्वरूप अंग्रेजी शासन का राजद्रोह केस मिल गया जिसके चलते माखनलाल चतुर्वेदी ने अन्य नाम से लेख लिखना शुरू किया जिनमें वनमाली, सच्चा सपुत्र, भारत माता का पुत्र, 

एक भारतीय आत्मा

 है जैसे अनेक नाम थे जिसमें उनका एक भारतीय आत्मा इतना प्रसिद्ध हुआ कि उन्हें' एक भारतीय आत्मा ' के रूप में जानें जाना लगा 

माखनलाल चतुर्वेदी ने आगें चलकर एक अखबार निकालने की सोची जिसमें उन्होंने कर्मवीर निकाला जो सबसे लम्बे समय तक प्रकाशित हुआ इसके अलावा उन्हें प्रभा पत्रिका भी निकाली जिसकी तुलना एक समय की सर्वश्रेष्ठ पत्रिका से सरस्वती से की जाती थी 

माखनलाल जी ने केवल पत्रकारिता में हीं नहीं  बल्कि 

  साहित्य में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन दिखाया जिसमें उन्होंने 

हिमकिरीटिनी, हिम तरंगिणी, युग चरण, समर्पण, 

  जैसी रचनाएँ लिखी 

जिसमें उन्हें' हिमतरंगिनी' के लिए साहित्य अकादमी का पुरस्कार भी मिला 

माखनलाल चतुर्वेदी ने आगे चलकर पत्रकारिता के कुछ सिध्दांत दिए जिसमें उन्होंने कहा कि " पत्रकारिता की जिम्मेदारी एक शिक्षक से भी बड़ी होती है क्योंकि एक शिक्षक केवल अपने छात्रों के लिए जबाबदेही रखता है किन्तु पत्रकारिता पूरे राष्ट्र के प्रति जबाबदेही रखती है इसलिए हमें पत्रकारिता के मूल्य से कभी समझौता नहीं करना चाहिए वो जनता की आवाज होती है इसलिए उसे जनता को केन्द्र में रखकर अपनी पत्रकारिता करनी चाहिए 

ऐसा नहीं है कि माखनलाल चतुर्वेदी ने पत्रकारिता करते समय किसी भी दुख परेशानी का सामना नहीं किया किन्तु उन्हें हमेशा अपने से आगे पत्रकारिता के सिद्धांत को रखा जब वो जेल में थे तब उन्होंने कोयल से अपनी व्यर्था बताते हुए अंग्रेजी शासन की क्रूरता पर एक कविता लिखी थी जिसकी चंद पंक्ति कुछ इस प्रकार से है - 

तुझे मिली हरियाली डाली,

मुझे नसीब कोठरी काली!

तेरा नभ भर में संचार

मेरा दस फुट का संसार!

तेरे गीत कहावें वाह,

रोना भी है मुझे गुनाह!

देख विषमता तेरी मेरी,

बजा रही तिस पर रण-भेरी!




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हम शायद भूल गए

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life real meaning thought

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