हे रोम रोम में बसने वाले राम


कल रामनवमी है जिससे मनाने का कारण पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार  राम का जन्म चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी को हुआ था जिसे पूरे देश में हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है सबसे मनोमोहक छटा राम की जन्मभूमि अयोध्या में देखने को मिलती है 

राम भगवान थे कि इंसान इस प्रश्न के भंवर में फंसने से अच्छा हम राम के चरित्र को देखे तो हम पाएगे एक ऐसा पुरूषोत्तम जिसने धर्म और मर्यादा की रक्षा के लिए अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया जिसमें उन्होंने अनेक तरह के कष्ट झेले यहाँ तक की अपनी पत्नी सीता का भी त्याग कर दिया जो पूरी तरह से निष्कलंक थी जिसके कारण राम को मर्यादा पुरुषोत्तम राम भी कहते हैं

आज के समय में अगर हम राम के चरित्र को खोजने चले तो भले हमें उनके एक दो गुण से विभूषित पुरुष मिल भी जाएं किन्तु सभी गुणो का किसी व्यक्ति में होना सिर्फ महज एक कोरी कल्पना है

वाल्मीकि की रामायण तुलसीदास की रामचरितमानस में कौन श्रेष्ठ है इस में अंतर करने से अच्छा में ये मालूम करे 

कि हम में और राम में क्या कोई ऐसे मिलते हैं गुण जो हमें राम की माला में गूथने को मजबूर करे 

आज न राजनीति न चुनाव का नारा हर जगह हम रामराज्य की कल्पना की कहानी सुनते हैं किन्तु ऐसा सुनते वक्त हम इसे वास्तविकता में कैसे लाएंगे उसकी कल्पना ही नहीं करते

वर्तमान समय में राम की प्रजा कोरोना वायरस की चपेट आ रही है हर दिन कोई आक्सीजन बिना  मारा जा रहा है

जहाँ कोरोना ही 1० मुख वाला रावण बन चुका है श्री राम कही अदृश्य हो ग ए है 

आज राम के भक्त जो सचे है ईमानदार है जिनके लिए सच ही सबकुछ है 

उन लोगों के लफ्ज़ केवल नीलकमल के गीत तक रह गयी है जिसकी चंद पंक्ति कुछ इस तरह से है

हे रोम रोम में बसने वाले राम

जगत के स्वामी हे अंतर्यामी

मै तुझसे क्या मांगू

मै तुझसे क्या मांगू

हे रोम रोम में बसने वाले राम.

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