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गाँव की हर समस्या को दिखाती पंचायत वेब सीरीज




वेब सीरीज: पंचायत

स्टार कास्ट: रघुवीर यादव, नीना गुप्ता,

जितेंद्र कुमार, चंदन रॉय, फैसल मलिक आदि।

निर्देशक: दीपक कुमार मिश्र

सृजनकर्ता: टीवीएफ

ओटीटी: प्राइम वीडियो

पंचायत वेब सीरीज मुख्य रूप से एक उत्तर प्रदेश के गाँव बलिया की कहानी है जिसमें मुख्य रूप से प्रधान और सचिव को केन्द्र में रखकर पूरी वेब सीरीज की कहानी को गढ़ा गया है 

ये कहानी एक अभिषेक त्रिपाठी नाम के एक युवा की है   कि जब एक पढ़ा लिखा व्यक्ति गाँव में कोई काम करने जाता है तो उसे उसके सोचे अनुसार कुछ भी नहीं मिलता वो देखता है जर्जर हुयी पंचायत की दीवार और भष्ट्राचार ने किस तरह से पूरे गाँव के विकास को खा लिया जहाँ केवल एक नारा ही रह गया है फुलेरी  गाँव को  नंबर वन बनाने का जबकि वास्तविकता ये है कि चुनाव आने पर ही जनता को याद किया जाता है

ये वेब सीरीज हम सब को पंचायत में महिला के आरक्षण की वास्तविक ता को भी बताती है जहाँ होती तो महिला संरपच है किन्तु सारे काम उसका पति करता है 

भले ही भारत का संविधान अनुच्छेद 14 के अनुसार विधि के समक्ष सबको समानता का अधिकार देने की बात करता है 

संविधान का भाग 9 पंचायत के लिए कुछ अनुच्छेद को रखता है जिसमें महिला आरक्षण की भी उचित व्यवस्था की गयी है 

वेब सीरीज कहानी के अंत में हम सब के लिए एक प्रश्न छोड़ जाती है कि क्यों आज भी महिला प्रधान होकर भी प्रधान नहीं होती उसका काम नाम मात्र कर दिया जाता है भले ही कानून की दृष्टि से व़ो ही प्रधान हो 

अगर आप गाँव के बारे में कुछ नया जानना चाहते पंचायत व्यवस्था की असलियत जानना चाहते हैं तो पंचायत वेब सीरीज जरूर देखिए इसके पूरे 8 पाठ है हर पाठ में कुछ नया है और इसमें एक ईमानदार सचिव की कहानी भी पेश की गई है जिसे  CAT  की परीक्षा पास करनी है और वो एक साथ सचिव का काम करते हुए किस तरह से CAT  की परीक्षा की तैयारी करता है ये भी इसमें दिखाया गया है भले ही 

वो पहले  CAT  की परीक्षा में फेल हो जाता है किन्तु  कहानी खत्म होते वो फिर उसकी दुबारा से तैयारी करता है.

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हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

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पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..