हम ,भारत के लोग,
भारत को एक सम्पूर्ण -प्रभुत्व ,
सम्पन्न समाजवादी, पंथ निरपेक्ष ,लोकतंत्रात्मक गणराज्य राज्य बनाने के लिए
उसके समस्त नागरिकों क़ो :
सामजिक ,आर्थिक और राजनैतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति
विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता
प्रतिष्ठा और अवसर की समानता
प्राप्त कराने के लिए,
तथा उन सब व्यक्ति की गरिमा और
राष्ट्र की एकता और
अखंडता सुनिश्चित होने वाली
बंधुता क़ो बढ़ाने के लिए
दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में
आज तारीख
26 नवम्बर 1949 ई को एतदद्वारा
इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और
आत्मर्पित करते हैं ।
(भारत के संविधान की प्रस्तावना)
जो भारत के 'संविधान की प्राण' कही जाती है ।आज इस संविधान के प्रारूप को तैयार करने वाले विदूषक डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर की जन्म तिथि है जिससे आप सब अवगत है । किन्तु क्या आपको मालूम है ? आज भी देश में अनेक गाँव, कस्बे है। जहाँ पर जाति के नाम पर उनका शारीरिक, आर्थिक शोषण करते हैं जिनका गुनाह केवल इतना है कि वो एक छोटी जाति से है ।
आज भी जब देश में किसी भी जाति को लेकर आरक्षण की बात आती है तो हम उसकी निंदा करते हुए कहते हैं कि अगर वो काबिलियत रखते हैं । तो वो स्वयं आगे आए न की आरक्षण का सहारा ले किन्तु वो ऐसे वचन बोलते समय ये कडवा सच भूल जाते हैं कि जिनके आरक्षण को लेकर वो विरोध कर रहे हैं उस तबके को उन लोगों ने कभी आगे आने ही नहीं दिया उन्होंने किताब पकड़नी चाहिए । तो उनके हाथ में काम करने के लिए
टोकरी पकड़ा दी स्कूल जाना चाहे तो समाज से बहिष्कार की बात कर दी जो ।आप मे से ज्यादा लोगों को एक कोरी कल्पना की तरह लगा सकती है किन्तु ये हमारे गाँव कस्बे की सच्चाई है वही इसका दूसरा पक्ष ये भी है कि आज हम शहर में कुछ लोगों को साधन सम्पन्न देखते है। तो हमें लगता है कि सभी लोग सम्पन्न है उन्हें आरक्षण की जरूरत क्या है ।
"आज बदलना होगा
उस नजरिये को
जो व्यक्ति के नाम से पहले
उसकी जात पूछता है"।
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