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लापरवाही की भी हद होती है


देश में स्वास्थ्य क्षेत्र की स्थिति लगातार खस्ता हो रही है लोग आक्सीजन ,रेमडेसिवीर जैसी चीजों को पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं वहीं दूसरी और एक अलग तमाशा जारी है जहाँ कही कही 

कुछ जनप्रतिनिधि ही कोरोना की गाइडलाइन्स की धजिय्यां उड़ा रहे हैं तो दूसरी जगह जनता भी उसमें कम शामिल नहीं है आज भी अगर हम अपने घर से कुछ दूर के किसी दुकान में जाए तो बहुत कम ही होगा जब हम अपने उस दुकानदार को मास्क लगा देखे और अगर उसने पहना भी लिया है तो उसके ग्राहक मास्क पहनना भूल सा जा रहे हैं 

सरकारी अस्पतालों की लापरवाही का क्या कहना, 

हर जगह एक के बाद एक लापरवाही दिखाई दे रही है और तब भी हम नहीं सोच रहे हैं कि हम अब 

स्वास्थ्य क्षेत्र की जर्जर हो रही इमारत दवा अस्पतालों की व्यवस्था को मजबूत करे एक साल पहले जब कोरोना भारत में आया था तब सब इसे अनजान थे किन्तु आज कोई भी इससे अनजान नहीं फिर भी अगर वो ढिलाई बरते तो दोष गैरों पर मड़ना गलत होगा.

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..