देश में स्वास्थ्य क्षेत्र की स्थिति लगातार खस्ता हो रही है लोग आक्सीजन ,रेमडेसिवीर जैसी चीजों को पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं वहीं दूसरी और एक अलग तमाशा जारी है जहाँ कही कही
कुछ जनप्रतिनिधि ही कोरोना की गाइडलाइन्स की धजिय्यां उड़ा रहे हैं तो दूसरी जगह जनता भी उसमें कम शामिल नहीं है आज भी अगर हम अपने घर से कुछ दूर के किसी दुकान में जाए तो बहुत कम ही होगा जब हम अपने उस दुकानदार को मास्क लगा देखे और अगर उसने पहना भी लिया है तो उसके ग्राहक मास्क पहनना भूल सा जा रहे हैं
सरकारी अस्पतालों की लापरवाही का क्या कहना,
हर जगह एक के बाद एक लापरवाही दिखाई दे रही है और तब भी हम नहीं सोच रहे हैं कि हम अब
स्वास्थ्य क्षेत्र की जर्जर हो रही इमारत दवा अस्पतालों की व्यवस्था को मजबूत करे एक साल पहले जब कोरोना भारत में आया था तब सब इसे अनजान थे किन्तु आज कोई भी इससे अनजान नहीं फिर भी अगर वो ढिलाई बरते तो दोष गैरों पर मड़ना गलत होगा.
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