स्वामी दयानंद on March 08, 2021 Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती आखिर क्यों मनाते हैंआज स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती है जो आर्य समाज के संस्थापक साथ ही भारत के आधुनिक विचारक और समाज सुधारक रहे हैंउन्होंने न केवल हिन्दू में फैली कुरीतियों का बल्कि इस्लाम और ईसाई में फैली कुरीतियों का भी निर्भय होकर विरोध किया.स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म 12 फरवरी 1824 को गुजरात में हुआ था. जबकि हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती मनाई जाती है. इस साल यह तिथि 08 मार्च यानी आज पड़ रही हैस्वामी दयानंद सरस्वती ने दिया था नारा- 'वेदों की ओर लौटो' सरस्वती ने वेदों के प्रचार और आर्यावर्त को स्वतंत्रता दिलाने के लिए मुम्बई में आर्यसमाज की स्थापना की थी उन्होंने वेदों की ही सबसे ऊंचा माना था साथ ही ' वेंदो की ओर लौटो ' का नारा दिया था और वेदों की व्याख्या की थी जिस कारण उन्हें ' ऋषि ' भी कहा जाता हैमहिलाओं के हक के लिए लड़े सरस्वतीस्वामी दयानंद सरस्वती ने समाज में फैली रूढ़िवादी सोच का पुरजोर विरोध किया साथ उन्होंन सत्ती प्रथा और बाल विवाह का विरोध किया और हिन्दू धर्म के वेदों का अध्ययन कर सही और गलत के बारे में उन्होंने लोगों को बताया.इस्लाम और ईसाई धर्म रूढ़िवादी सोच का विरोधस्वामी दयानंद सरस्वती ने केवल हिन्दू धर्म में व्याप्त रूढ़िवादी सोच का ही विरोध नहीं किया बल्कि ईसाई धर्म और इस्लाम धर्म में व्याप्त कुरीतियों का भी मुखर होकर विरोध कियाआर्य समाज की स्थापना - स्वामी दयानंद सरस्वती ने महाराष्ट्र में आर्य समाज की स्थापना की जिसका मुख्य उद्देश्य समाज को सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरुक करना थाआर्य समाज के लिए ये है विशेष दिनस्वामी दयानंद सरस्वती आर्य समाज के गुरु ईश्वर माने जाते हैं आर्य समाज हमेशा अपने आप को स्वामी जी के सानिध्य में पाते हैं और वो इस दिन एक त्यौहार मनाते है आज भी आर्य समाज में शिक्षा की तरह वैदिक पुराण का अध्ययन किया जाता हैस्वामी दयानंद सरस्वती के विचारआप दूसरों को बदलना चाहते हैं ताकि आप आज़ाद रह सकें. लेकिन, ये कभी ऐसे काम नहीं करता दूसरों को स्वीकार करिए और आप मुक्त हैंजीवन में मृत्यु को टाला नहीं जा सकता. हर कोई ये जानता है, फिर भी अधिकतर लोग अंदर से इसे नहीं मानते- ‘ये मेरे साथ नहीं होगा.’ इसी कारण से मृत्यु सबसे कठिन चुनौती है जिसका मनुष्य को सामना करना पड़ता है.' Comments
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