परीक्षा कोई भी हो सबको पास करने के लिए मेहनत बहुत करनी होती है महज फर्क इसे पड़ जाता है कि जिंदगी की परीक्षा में प्रश्न पत्र खुद बनाना और भरना होता है ओर उसे खुद ही जांचना होता है
जिंदगी बनाम परीक्षा शुरू हमारे जन्म से होती जिसका अंत जिंदगी में तब होता है जब हमारी सभी इच्छाएं खत्म हो जाती है महज बचता है तो केवल आत्मग्लानि इसलिए जरूरी हो जाता है खुद को हर दिन परीक्षा के लिए तैयार करना अपने परीक्षा के पर्चे को इतना कठिन बनना चाहिए कि जिंदगी की परीक्षा को पास करने में कोई तकलीफ न हो
"है परीक्षा किसी की जान लो
साहिब
ये नहीं होती गुलाम किसी की
ये जान लो साहिब
इसमें कामयाब वहीं होता
जिसके लिए जिंदगी जीना ही एक परीक्षा है".
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