किसी भी चीज़ की शुरुआत करना जितना मुश्किल होता है उसे कही ज्यादा मुश्किल उसे लगातार करते जाने में होता है जब आपके सामने अनेक तरह की परेशानी खड़ी हो जाती है और उस समय आपको अपने आप से ही प्रश्न करना पड़ता है?
कि जिस काम को शुरू किया है उसे अंत तक ले जाने में क्या मैं कामयाब होगा की नहीं ,
कुछ इसके जबाब को खोजते - खोजते अपने काम में इस कदर से लग जाते हैं कि उन्हें न किसी दुनिया दारी की फ्रिक होती है और न खुद के स्वास्थ्य की इन दोनों में जो लोग संयम बना लेते हैं वो रेल की पटरी की तरह अपने काम को करने में लगे रहते हैं बिना इसके कि क ई ऐसी ट्रेन तो नहीं चल रही उनके ऊपर जिनसे उनके बहुत से गिले-शिकवे है वो फर्क हीन होकर अपने वजूद को खोजने निकल जाती है,
इस पड़ाव पर पहुंचकर जितना हम अपनी जिंदगी को नहीं समझ पाते उतना वो हमें समझ लेती है और हम एक बंदिश रहित चिड़िया की तरह उड़ने लगते हैं जो काम कल तक उसके लिए " हाथ पर सरसों जमाने सा "है जिसका भावार्थ (असम्भव काम को सम्भव करना
वो उस काम में हुनरमंद) हो जाते हैं
ऐसा नहीं इस बीच उनके जीवन में कोई तकलीफ नहीं आती किन्तु वो प्रभाव हीन होकर अपने काम को करते जाते हैं ,
इस जिंदगी में एक परिस्थिति ऐसी जरूर आती है जहाँ एक तरफ "कुंआ दूसरी तरफ खाई रह जातीहै"
जिसकी जीत होती इसमें वो दुनिया में सराहे जाते हैं और जो हार जाते हैं वो दुनिया में बोझ बन जाते हैं ऐसे में फिर भी 'कुछ ही लोग मुकद्दर का सिकंदर बन जाते' हैं
जिंदगी में ज्यादा तजुर्बा न रखने वाले एक नासमझ पुत्र को भी जीवन की आधी लड़ाई लड़ते उसकी अक्ल ठिकाने लग जाती है
ये दुनिया की सच्चाई है माता पिता का दर्द जितना बेटे नहीं समझ पाते उतना बेटी समझ जाती है पर अफ़सोस वो तो न घर की न घाट की रह जाती है घर में होती है तो घरवाले कहते तु पराई है ससुराल जाती है तो कहते हैं पराए घर से आयी है फिर एक बेटी की जिंदगी इतनी संघर्षमायी हो जाती है कि वो य तो चिड़िया बन जाती है यहाँ कैदी रह जाती है,
एक लेखक की तो इसे भी खराब जिंदगी हो जाती है सब कुछ देखकर सिर्फ लिखने का होता था उसे जो अधिकार अब तो उस कलम पर भी, सरकार की निगाहे आ जाती है क्या करे ईमानदार लेखक जिनकी जिंदगी
अक्सर तमाम बंदिशे में सिमटकर न लिखने के दर्द के बीच आ जाती है
फिर भी यकीन मानिए कि जिंदगी में सबसे ज्यादा रौब एक बेटी अपने पिता पर कर पाती है क्योंकि वो अक्सर पिता को सलाह देते एक बेटा बन जाती है एक बेटे के लिए सबसे बड़ी खुशी उसके माँ बाप के द्वारा उसकी हर जिंद्द पूरी करना उसके लिए जन्नत सी बन जाती है एक स्वतंत्र लेखक की लेखनी में अगर अकुंश न लगे तो उसकी लेखनी अक्सर समाज को एक सही आईना दिखाती है
अक्सर जिंदगी होती तो सब की है किन्तु कुछ की जिंदगी खुद पर यकीन करने से ताजमहल जैसी बन जाती है जिसे हर कोई देखना चाहता है जानना कोई नहीं
इस जिंदगी में अक्सर वहीं ताल्लुकात रह जाते हैं जिनकी बातें लगी हो भले एक समय बुरी परंतु आज उनके ही कारण जिंदगी अर्थपूर्ण हो जाती है
जिंदगी की सच्चाई पर लिखने वालों की कलम अक्सर
मौत पर आकर रूक जाती है
किन्तु उसकी लिखी कुछ बातें अक्सर 'पत्थर की लकीर' बन जाती है
इस जिंदगी पर लिखने वाले जानते हैं इसकी शख्सियत जहाँ हर दिन उठने के लिए मेहनत करनी होती है सफल हुए लोगों के जीवन में तो हार जीत कभी रूकती नहीं कितनी आगे उनकी रूह भी कफ़न से जिंदगी की अच्छाई- बुराई बताते हुए सिमट सी जाती है ,
पर फिर भी जिंदगी आखिर लम्हें तक केवल खुद पर यकीन करने का जोर दे जाती है रोने वाले रोते रोते रह जाते हैं जिंदगी की बुराई करते किन्तु किसी जिंदगी सच में खुद के वजूद पर यकीन करने का एक सफलता अनोखा तोहफा दे जाती है,
यकीन मानिए जिंदगी
जो जानकर
भी नहीं समझते
उनकी जिंदगी
एक बंजर
घोसला रह जाती है
कुछ खुद पर इतना यकीन कर लेते हैं
कि मौत आने पर भी
उनकी जिंदगी जीने के तरीके
अवाम के सामने एक पहेली बन जाती है.
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