कुछ ख्वाब


जीवन हमारा एक खेल की तरह है जिसमें हर कोई नहीं खेलता है कुछ लोग उसके लिए तैयारी करते हैं तो कुछ लोग तैयार होते हैं कुछ खेलने से पहले ही हार जाते हैं इस खेल में

वो ही टिक पाते हैं जिनके सपने बड़े इरादे मजबूत होते हैं जो गिरकर उठना जानते हैं वहीं लोग अक्सर तराशे जाते हैं

जिंदगी हर दिन खुद को तराशने के लिए एक मौका देती है कुछ उसे पा लेते हैं कुछ उसे गबां देते हैं कुछ के सिर्फ बहाने रह जाते हैं ये बात गौर फरमाने वाली है कि हर किसी की आरजू होती है आसमान में उड़ान भरने की , समुद्र में छलांग लगाने की, तारे से बात करने की, हवा से भी तेज दौड़ने की ,इन सब चीजों में अक्सर वो भूल जाते है वो खुद के उन इरादों की जिसके लिए वो 

आये थे मुश्किलों भरे इस चौखट में अगर जीत गए तो वो हीरा कहलाते हैं अगर हार गए तो 

नाकाबिल कहलाते हैं 

  जिंदगी में सिर्फ एक चीज होती है कि खुद को कल से बेहतर कितना आज बना पाएं है .

कुछ ख्वाब बुन लिए है आंखों में

कुछ ख्वाब बुनना बाकी है

इम्तिहान अधूरा है अभी

पूरा करने के लिए

तूफानों से लड़ना बाकी है

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