होली


होली रंगों का त्यौहार होता है  lजो हमें  सामाजिक  समरसता का संदेश देता है l होली का त्यौहार हिन्दू धर्म के लोगों  के मुख्य त्यौहार में से एक है जो कि फाल्गुन माह के  शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है जिसमें  पूर्णिमा के दिन होलिका दहन किया जाता है और उसके  दूसरे दिन होली खेली जाती  है l

उत्तर भारत में होली के आठ दिन पहले  जहाँ पर होलिका जलाना है वहाँ पर गोकाष्ट  रखा दिया जाता है l जिसे 'होलिकाष्टक 'के नाम से जाना जाता है साथ ही इस दिन से लेकर  होली तक घरों के बाहर रंगोली बनाई जाती है l

वैसे तो होली दो दिन की होती है l किन्तु जहाँ के नाम से होली विश्व भर में प्रसिद्ध है  lजिसे देखने के लिए विदेशभर के लोग भारत आते हैं वो होली पूरे चालीस दिन तक मथुरा, वृदांवन, ब्रज में खेली जाती है l जिसमें फूलो की होली, लट्ठ मार होली, लड्डू की होली होती है l

वैसे तो होली की उत्पत्ति के लिए क ई पौराणिक कथाएँ है l किन्तु होली के समकक्ष सबसे ज्यादा भक्त प्रहलाद और भगवान शिव की कहानी देखी जाती है l

विष्णु पुराण के अनुसार एक अंहकारी राजा हिरण्यकश्यप था जिसने अपने पुत्र को मारने के लिए कोई कसर  नहीं छोड़ी थी जिसका कारण केवल इतना था कि वो  भगवान विष्णु  का सबसे बड़ा भक्त था l  जब वो अपने बेटे  प्रहलाद  को मारने में असमर्थ हो जाता है तब वो अपनी बहन होलिका को जिसे 'भगवान ब्रह्मा से ये वरदान प्राप्त है कि अग्नि उसे छू नही सकती  '
 फाल्गुन माह की पूर्णिमा को  प्रहलाद  के साथ अग्नि में  बैठने को कहता है l जिससे कि प्रहलाद के प्राण चले जाए और उसकी बहन होलिका भगवान ब्रह्मा के वरदान का प्रत्यक्ष दर्शन सभी को कर सके  किन्तु होलिका पर उसे कुकर्मो के चलते भगवान का वरदान अभिशाप बन जाता है lऔर वो अग्नि में जल जाती है और भक्त प्रहलाद सकुशल अग्नि से निकल आते है तब से लोग भक्त प्रहलाद और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और इस अवसर पर रंगों के साथ खेलते हैं  

दूसरी कथा भगवान शिव की है 
शिव पुराण के अनुसार एक बार कामदेव भगवान शिव को समाधि से उठाने के लिए उन पर काम के बाण का उपयोग करते हैं l जिसे क्रोधित होकर भगवान शिव कामदेव को अपनी क्रोध की अग्नि  से भस्म कर देते हैं तभी कामदेव की पत्नी रति भगवान शिव से उनकी करनी के लिए क्षमा मांगती है lऔर भगवान शिव को अपने पति के प्राण लौटाने को कहती है तब भगवान शिव उन्हें दोनों को पुन : जन्म आशीर्वाद देते हैं l और तब माता रति  राधा और कामदेव  श्री कृष्ण के रूप में धरती पर जन्म लेते हैं lअपने पुन : मिलन की खुशी में वो रंगों से खेलते हैं और जनता उनके साथ रंगों में रंग जाती है जिसके चलते होली मनायी जाती है l

होली पर मुख्य रूप से भगवान शिव, विष्णु और राधा कृष्ण भक्त प्रहलाद की पूजा की जाती है l

आज समकालीन समय में त्यौहार की चहल  पहल कोरोना वायरस के चलते भले फीकी हुई हो किन्तु परिवार में इस त्यौहार की मिठास अभी भी है l लोग होली के त्यौहार का इंतजार फाल्गुन माह के शुरू होने से करने लगते  हैं l जहाँ विवाहित स्त्री इस त्यौहार को अपने मायके में मनाने का सोचती है l वही दूसरे राज्य, देशों में रह रहे लोग होली पर अपने घर आते हैं और होली अपने परिवार के साथ खेलते हैं l

Comments