23 मार्च से देश में लॉकडाउन को पूरा एक साल हो गया है l जो भले आज हमें ऐसा महसूस हो रहा है lकि आज आया और कल चला गया किन्तु वो दिन कितने अच्छे कटे इसकी सच्चाई से हम सब वाकिफ है l
जिसका नजारा कुछ इस तरह देखने को मिला l
जहाँ एक तरफ लोगो में उदासी थी तो दूसरी तरफ के असंगठित क्षेत्र के लोगों की स्थिति दयनीय थी l जिसमें कितने मजदूरों को पैदल ही घर जाना पड़ा था जो उनकी पहुंच के कोसो दूर था l आज वो मजदूर वर्ग फिर काम की तलाश में शहर में भले आ गए हैं किन्तु उनके पांव के जख्म अभी भी ताजे है आज अगर हम उनसे बात करे तो हम जानेगें कि आज उनकी कमाई पहले की तुलना में बहुत कम हुई है और दूसरी मंहगाई ने उनकी कमर तोड़ दी जिसके चलते कितने मजदूरों के बच्चे स्कूल से फीस न देने के कारणवश निकाल दिए गए हैं l भले हम सब को ये बात बहुत सामान्य लगे किन्तु वो इतनी सामान्य नहीं
देश ने इस एक साल में कोरोना वायरस के चलते केवल अर्थव्यवस्था की रफ़्तार ही नहीं कम नहीं देखी बल्कि इस कोरोना ने कई लोगों के जनाजे भी उठा दिया l
देश में कोरोना वायरस के केस देश में फिर से आने लगे हैं जिसमें कुछ राज्य का योगदान कुछ ज्यादा ही है l
अगर हम अब भी नहीं सम्भले तो बहुत देर हो जाएगी
मेरी आप सब से गुजारिश है कि आप कोरोना वायरस को मजाक में न ले क्योंकि आपको भले ये वायरस वायरस न लगे किन्तु इस वायरस ने क ई परिवार को उजाड़ दिया l आप अपना नहीं तो कम से कम अपनों के लिए तो अपनी सुरक्षा रखे साथ ही अपने आस पास भी इसके लिए जागरूकता फैलाएं
क्योंकि आवश्यकता अब ठोस कदम उठाने की है l
"नहीं तो कही ऐसा पल फिर न
आवे
कि हम केवल यहीं कह पावे
ये कहा आ गए हम "l
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