रचना की प्रक्रिया एक दिन में न तो शुरू होती है और न ही एक दिन में खत्म होती है इसे करने में एक अवधि का समय लगता है जिस तरह प्रकृति में जो भी चीज़ होती है वो एक प्रक्रिया के अनुसार आती और जाती है उदाहरण के लिए चना इसका नाम भले ही छोटा हो किन्तु इसकी विकास की प्रक्रिया बहुत लम्बी होती है पहले चने की भाजी होती है और जब वो पेड़ बढ़ता है तो उसमें हरे चने लगते हैं और एक समय के बाद जब वो पेड़ सूकने लगता है तब चने पक जाते हैं और फिर चने चटपटे जैसी चीज को हम खाते है
जीवन हमारा एक प्रक्रिया के अनुसार चलता है जिसे संस्कृत के श्लोक से समझ जाता है
प्रथम नर्जित विद्या द्वितीय नर्जित धनम्
तृतीय नर्जित पुण्य चतुर्थ कि करिष्यति
जिसका अर्थ अगर तुमने बाल्यकाल शिक्षा ग्रहण नहीं की दूसरी अवस्था धन नहीं कमाया तृतीय अवस्था में पुण्य नहीं किया तो चतुर्थ अवस्था अर्थात बुढ़ापे की अवस्था में तुम क्या करेगे
जीवन में सब चीज एक प्रक्रिया के अनुसार होती है कुछ इस प्रक्रिया में खुद को ढालकर एक मजबूत वृक्ष बन जाते हैं तो कुछ इसके विपरीत एक जटिल वृक्ष की तरह हो जाते हैं
आज 21 शताब्दी में हम पर निर्भर करता है कि हमें क्या बनना है कठोर या मजबूत.
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