Skip to main content

रचना की प्रक्रिया

 

रचना की प्रक्रिया एक दिन में न तो शुरू होती है और न ही एक दिन में खत्म होती है इसे करने में एक अवधि का समय लगता है जिस तरह प्रकृति में जो भी चीज़ होती है वो एक प्रक्रिया के अनुसार आती और जाती है उदाहरण के लिए चना इसका नाम भले ही छोटा हो किन्तु इसकी विकास की प्रक्रिया बहुत लम्बी होती है पहले चने की भाजी होती है और जब वो पेड़ बढ़ता है तो उसमें हरे चने लगते हैं और एक समय के बाद जब वो पेड़ सूकने लगता है तब चने पक जाते हैं और फिर चने चटपटे जैसी चीज को हम खाते है

जीवन  हमारा एक प्रक्रिया के अनुसार चलता है जिसे संस्कृत के श्लोक से समझ जाता है

प्रथम नर्जित विद्या द्वितीय नर्जित धनम्

तृतीय नर्जित पुण्य  चतुर्थ कि करिष्यति 

जिसका अर्थ अगर तुमने बाल्यकाल शिक्षा ग्रहण नहीं की दूसरी अवस्था धन नहीं कमाया तृतीय अवस्था में पुण्य नहीं किया तो चतुर्थ अवस्था अर्थात बुढ़ापे की अवस्था में तुम क्या करेगे

जीवन में सब चीज एक प्रक्रिया के अनुसार होती है कुछ इस प्रक्रिया में खुद को ढालकर एक मजबूत वृक्ष बन जाते हैं तो कुछ इसके विपरीत एक जटिल वृक्ष की तरह हो जाते हैं 

आज 21 शताब्दी में हम पर निर्भर करता है कि हमें क्या बनना है कठोर या मजबूत.

Comments

Popular posts from this blog

Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..