व्यक्तित्व के विकास का मतलब आपके चरित्र का निर्माण किस तरह से हुआ है सामान्य परिस्थितियों के मुकाबले बुरी परिस्थितियों में कैसे आप उसे सुलझाते हो
व्यक्तित्व के विकास का पैमाना इसे नापा जाता है कि वो अपने काम के सलीके से किसी व्यक्ति को किस तरह से प्रभावित करता है साथ ही उसकी करनी और कथनी में किस तरह की है
व्यक्तित्व का विकास
जिससे हम अक्सर समझने में भूल कर देते हैं हम ज्यादा तर यहीं सोचते हैं कि व्यक्तित्व के विकास का मतलब हमारा शारिरिक विकास है जबकि इसका मतलब हमारे चरित्र के निर्माण से है कि हम किस परिस्थितियों में कैसा व्यवहार करते हैं.
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