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क्या अवगत है हम अपने अधिकारों और कर्तव्यों से


भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ नागरिकों को कुछ मौलिक अधिकार दिए गए हैं जिसमें अनुच्छेद 14 समता का अधिकार जो नागरिकों को विधि के सामने समानता का अधिकार देता है अनुच्छेद 19 स्वतंत्रता का अधिकार

 अनुच्छेद 23 शोषण के विरूद्ध अधिकार 25 धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार 29 संस्कृति शिक्षा का अधिकार 

वहीं अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपचारों का अधिकार हमें देता है

वहीं भारत का संविधान भारत के नागरिकों को कुछ 

मौलिक कर्तव्य भी देता है जिसमें देश की एकता अखंडता को बनाए रखना, पर्यावरण का संरक्षण करना, देश की विरासत की सुरक्षा करना, देश के राष्ट्रगीत और राष्ट्र गान का आदर करना 

आज अगर हम 21 शताब्दी के परिदृश्य में अपने अधिकार और कर्तव्य को देखे तो पाएंगे कि हम अपने अधिकार का उपयोग तो फिर भी कर रहे परन्तु अपने कर्तव्य की बातें नहीं कर रहे हैं इस पर भी हमें ध्यान देने की जरूरत है.

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..