जब तक है जान


जिंदगी में किसी का कोई भी ठिकाना नहीं आज जिस से मिल रहे हैं कल उसे मुलाकात होगी कि नहीं होगी भी तो कैसे होगी इसलिए जीवन की अनिश्चितता को देखते हुए जीवन ऐसा जीओं कि मरते वक़्त भी ये याद रहे जिस सपने को आंखों में देखा उसे पूरा करके जा रहे हैं कोई भी किसी तरह का जीवन के प्रति कोई कर्ज छोड़ कर नहीं जा रहे हैं जीवन अनिश्चित है सफलता और असफलता अनिश्चित है किन्तु अपने जुनून के साथ अपने सपनों को वास्तविक लाना हम पर निर्भर करता है कि ये कल्पना बनकर रहती है या वास्तविक होती है

 जिंदगी छोटी है सपने बड़े है

 इरादे छोटे है ख्वाब बड़े मुश्किलें ज्यादा है 

तब भी जुनून के साथ जिंदगी जीना जरूरी है

 जब तक है जान खुद को तराशना जरूरी है.

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