कहानी सुनते मालूम चलता है
जिंदगी की कुछ कहानी का कभी अंत ही नहीं होता
जहाँ शुरू होती वो
कभी कभी वहीं रूक जाती वो,
कुछ बनती कहानी
कुछ बिग़ड़ती कहानी
क्या हर कहानी
अंत हो
ये क्या जरूरी सा होता?
हर कहानी नहीं होती कामयाब ये
जान लो
कुछ कहानी की तो शुरूआत ही
नाकामयाबी से होती
सफर तो होता है बड़ा इंसानियत का
पर क्या हर इंसान अच्छा हो
क्या जरूरी ही होता ?
कुछ कहानी बिन कहे ही बहुत कुछ है कह देती
कुछ का तो अंत भी
खामोशी से होता ,
फाल्गुन माह में
होती कहानी की शुरुआत
पर किसी -किसी का तो अंत
चैत्र माह में होता ,
क्या हर कहानी होती
अर्थपूर्ण
कुछ कहानी का तो अंत ही दर्द
से शुरू और उसे ही
खत्म होता,
अच्छी कहानी भले याद न हो हमें
किंतु
हर बुरी कहानी का अंत हमें क्यों याद होता
ये सच ही है
हर कहानी का अंत नहीं होता.
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