Sunday thought


निगाहें चाहे किसी की तरफ हो तुम्हारी अक्सर आईना तुम ही लोगों के बन जाते हो.

 लोग कैसा भी सलूक करे तुम से तुम्हारी  गुस्ताखी अक्सर अखबार नामा हो जाती है.

फिजूल की बातें अक्सर लोग से हो जाती है . 

मिन्नत मांगों की सारी ख्वाहिशें पूरी हो उसकी जिसने दिन और रात धूप और छाव को खुद पर असर नहीं होने दिया.

गुजारिश करो कि तुम नेक दिल जरूर हो भले लोग कुछ भी कहे तुम्हारे वास्ते.

किसी अच्छी आदत को जल्दी छोड़ा जा सकता है किन्तु बुरी आदत को नहीं.

थके हुए शरीर होने के बावजूद अगर काम करने की ललक है तो सच में तुम एक नयी दिशा की ओर मुड़ रहे हो.

बुरी आदतें और हद से ज्यादा इच्छा बुरी होती है.

दिन से ज्यादा लोग बदलते है लोग से ज्यादा अपने बदलते है

जरूरत में कम होने वाली हर वो चीज याद रखनी चाहिए जिसने एहन वक्त में साथ दिया जब सुबह खमोश और रात शोरगुल थी.

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