न लिख पाने का दर्द


वो चीज जो कोई भी लिख सकता है वो बहुत सामान्य हो चुका है पढ़ना वो चीज जो ज्यादा बिक चुका है वो आसान है खरीदना वो लोग जो ज्यादा पढ़ चुके हैं बहुत आसान है क्या उन से ज्यादा पढ़ना ?

वो आंधी जो क ई बार आ चुकी है क्या आसान है फिर से लाना.

आसान है क्या हर चीज लिखना हर कुछ कहना हर किसी के बारे में बताना लोग बहुत लिख चुके हैं कुछ विषय पर क्या नया कुछ लिखना आसान है जो लिखा ही जाना नामुमकिन सा है.

न लिखने का दर्द पूछों उनसे जो अक्सर क ई दृश्य को भी देखकर कलम नहीं चल सकते न लिख सकते न कह सकते.

न लिखने का दर्द क्या नही है बड़ा.

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